16 Jun 2014

जम्मू-कश्मीर में धारा 370


आप भी जानिये धारा 370
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जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है ।
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जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग होता है ।
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जम्मू - कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है
जबकी भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5
वर्ष का होता है ।
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जम्मू-कश्मीर के अन्दर भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय
प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं होता है ।
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भारत के उच्चतम न्यायलय के आदेश जम्मू - कश्मीर के अन्दर
मान्य नहीं होते हैं ।
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भारत की संसद को जम्मू - कश्मीर के सम्बन्ध में अत्यंत सीमित
क्षेत्र में कानून बना सकती है ।
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जम्मू कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के
व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त
हो जायेगी । इसके विपरीत यदि वह पकिस्तान के
किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उसे भी जम्मू - कश्मीर
की नागरिकता मिल जायेगी ।
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और
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धारा 370 की वजह से कश्मीर में RTI लागु नहीं है । RTE लागू
नहीं है ।
CAG लागू नहीं होता । …। भारत का कोई भी कानून लागु
नहीं होता ।
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कश्मीर में महिलावो पर शरियत कानून लागु है ।
कश्मीर में पंचायत के अधिकार नहीं ।
कश्मीर में चपरासी को 2500 ही मिलते है ।
कश्मीर में अल्पसंख्यको [ हिन्दू- सिख ] को 16 % आरक्षण
नहीं मिलता ।
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धारा 370 की वजह से कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद
सकते है ।
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धारा 370 की वजह से ही पाकिस्तानियो को भी भारतीय
नागरीकता मिल जाता है ।
इसके लिए पाकिस्तानियो को केवल किसी कश्मीरी लड़की से
शादी करनी होती है ।
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अच्छी शुरुवात है कम से कम 370 हटाने की दिशा में एक कदम
आगे की ओर मोदी जी को धन्यवाद जो उन्होनें धारा 370
का मुद्दा उठाया ।
अब यदि कोई सेकुलर इन तथ्यों के विषय में कुछ कहना चाहे
तो स्वागत हैं...

पिज्जा और flavor( flavor Enhancer)

आजकल बहुत से लोग हैं जिन्हें "पिज्जा" खाने में बड़ा मज़ा आता है . चलिये पिज्जा पर एक नज़र डालें >> पिज्जा बेचनेवाली कंपनियाँ "Pizza Hut, Dominos, KFC, McDonalds, Pizza Corner, Papa John’s Pizza, California Pizza Kitchen, Sal’s Pizza" ये सब कम्पनियॉ अमेरिका की है अब मैंने हिसाब लगाया कि पिज्जा बनाने में 50 रुपए से ज़्यादा का सामान नहीं लगता .... और गैस और बाकी खर्च मिला कर करीब 70 रुपए में एक सड़ा हुआ पिज्जा आसानी से बन जाता है ..... (चलो 30 रुपए विज्ञापन करने के भी जोड़ ही लो) तो एक पिज्जा का लागत मूल्य हुआ 100 /- कंपनियाँ इसी पिज्जा को 350/- रुपए के करीब बेचती हैं ..... अब बाकी का 250 रुपए (जो कि शुद्ध मुनाफा है) कंपनियाँ अपने साथ अमरीका ले जाती हैं (क्योंकि ये सारी कंपनियाँ अमेरिकी हैं) .... आप चाहे तो Wikipediya पे देख सकते हो. अब आती है सोचने वाली बात ..... अमेरिका की दादागिरी किसी से छुपी नहीं है ..... और जब भी कुछ छोटी सी भी बात होती है .... अमेरिका ही ऐसा अकेला देश है जो पाकिस्तान की आर्थिक मदद करता है .... और ये बात भी किसी से छुपी हुई नहीं है कि पाकिस्तान अपने मुल्क में आतंकवादियों की मदद करता है ..... आतंकवादी फिर उसी पैसे से हथियार खरीदते हैं ..... तो >> हमने जो पैसा अमेरिका को दिया .... अमेरिका ने पाकिस्तान को दिया .... पाकिस्तान ने आतंकवादियों को दिया .... और आतंकवादियों ने उससे हथियार खरीदे .... अब थोड़ा हिसाब-किताब किया जाये ..... एक साधारण बंदूक की गोली 75 रुपए की होती है .... तो आप एक पिज्जा खाने के समय करीब 2 लोगों की मौत का भी प्रबंध कर रहे हैं ..... "सड़े हुए मैदे" का पिज्जा खाकर .... क्या हम अपने ही देश से गद्दारी नहीं कर रहे ? Not:- पिज्जा मे टेस्ट लाने के लिये E-631 flavor Enhancer नाम का तत्व मिलाया जाता है वो सुअर के मॉस से बनता है आप चाहो तो Google पे देख लो. Sahi lage to is msg ko aage failaye ● सावधान मित्रों अगर खाने पीने कि चीजों के पैकेटो पर निम्न कोड लिखे है तो उसमें ये चीजें मिली हुई है. E 322 - गाये का मास E 422 - एल्कोहोल तत्व E 442 - एल्कोहोल तत्व ओर कमिकल E 471 - गाय का मास ओर एल्कोहोल तत्व E 476 - एल्कोहोल तत्व E 481 - गाय ओर सुर के मास ए संगटक E 627 - घातक केमिकल E 472 - गाय + सुर + बकरी के मिक्स मास के संगटक E 631 - सुर कि चर्बी का तेल ● नोट - ये सभी कोड आपको ज्यादातर विदेशी कम्पनी एवम् निम्न. ● जेसे :- चिप्स , बिस्कुट , च्युंगम , टॉफी ,कुरकुरे ओर मैगी आदि में दिखेगे l ● ध्यान दे ये अफवह नही बिलकुल सच है अगर यकीन नही हो तो इंन्टरनेट गुगल पर सर्च कर लो. ● मैगी के पैक पे ingredient में देखें , flavor (E-635 ) लिखा मिलेगा. ● आप चाहे तो google पर देख सकते है इन सब नम्बर्स को:- E100, E110, E120, E 140, E141, E153, E210, E213, E214, E216, E234, E252,E270, E280, E325, E326, E327, E334, E335, E336, E337, E422, E430, E431, E432, E433, E434, E435, E436, E440, E470, E471, E472, E473, E474, E475,E476, E477, E478, E481, E482, E483, E491, E492, E493, E494, E495, E542,E570, E572, E631, E635, E904. ●jai bharat-------------_-----------------

भारत की संस्कृति

अपनी भारत की संस्कृति को पहचाने.ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुचाये. यही है हमारी संस्कृति की पहेचान. ***************************** ( ०१ ) दो पक्ष- कृष्ण पक्ष , शुक्ल पक्ष ! ( ०२ ) तीन ऋण - देव ऋण , पितृ ऋण , ऋषि ऋण ! ( ०३ ) चार युग - सतयुग , त्रेतायुग ,द्वापरयुग , कलियुग ! ( ०४ ) चार धाम - द्वारिका , बद्रीनाथ , जगन्नाथ पूरी , रामेश्वरम धाम ! ( ०५ ) चारपीठ - शारदा पीठ ( द्वारिका ) , ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम ) , गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) , श्रन्गेरिपीठ ! ( ०६ ) चार वेद- ऋग्वेद , अथर्वेद , यजुर्वेद , सामवेद ! ( ०७ ) चार आश्रम - ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , वानप्रस्थ , संन्यास ! ( ०८ ) चार अंतःकरण - मन , बुद्धि , चित्त , अहंकार ! ( ०९ ) पञ्च गव्य - गाय का घी , दूध , दही ,गोमूत्र , गोबर ! ( १० ) पञ्च देव - गणेश , विष्णु , शिव , देवी ,सूर्य ! ( ११ ) पंच तत्त्व - पृथ्वी , जल , अग्नि , वायु , आकाश ! ( १२ ) छह दर्शन - वैशेषिक , न्याय , सांख्य ,योग , पूर्व मिसांसा , दक्षिण मिसांसा ! ( १३ ) सप्त ऋषि - विश्वामित्र , जमदाग्नि ,भरद्वाज , गौतम , अत्री , वशिष्ठ और कश्यप! ( १४ ) सप्त पूरी -अयोध्या पूरी ,मथुरा पूरी , माया पूरी ( हरिद्वार ) , काशी , कांची ( शिन कांची - विष्णु कांची ) , अवंतिका और द्वारिका पूरी ! ( १५ ) आठ योग - यम , नियम , आसन ,प्राणायाम , प्रत्याहार , धारणा , ध्यान एवं समाधी ! ( १६ ) आठ लक्ष्मी - आग्घ ,विद्या , सौभाग्य ,अमृत , काम , सत्य , भोग ,एवं योग लक्ष्मी ! ( १७ ) नव दुर्गा -- शैल पुत्री , ब्रह्मचारिणी ,चंद्रघंटा , कुष्मांडा , स्कंदमाता , कात्यायिनी ,कालरात्रि , महागौरी एवं सिद्धिदात्री ! ( १८ ) दस दिशाएं - पूर्व , पश्चिम , उत्तर , दक्षिण ,इशान , नेऋत्य , वायव्य , अग्नि , आकाश एवं पाताल ! ( १९ ) मुख्य ११ अवतार - मत्स्य , कच्छप , वराह ,नरसिंह , वामन , परशुराम ,श्री राम , कृष्ण , बलराम , बुद्ध , एवं कल्कि ! ( २० ) बारह मास - चेत्र , वैशाख , ज्येष्ठ ,अषाढ , श्रावण , भाद्रपद , अश्विन , कार्तिक ,मार्गशीर्ष , पौष , माघ , फागुन ! ( २१ ) बारह राशी - मेष , वृषभ , मिथुन ,कर्क , सिंह , कन्या , तुला , वृश्चिक , धनु , मकर , कुंभ , कन्या ! ( २२ ) बारह ज्योतिर्लिंग - सोमनाथ , मल्लिकार्जुन ,महाकाल , ओमकारेश्वर , बैजनाथ , रामेश्वरम ,विश्वनाथ , त्र्यंबकेश्वर , केदारनाथ , घुष्नेश्वर ,भीमाशंकर ,नागेश्वर ! ( २३ ) पंद्रह तिथियाँ - प्रतिपदा ,द्वितीय , तृतीय , चतुर्थी , पंचमी , षष्ठी , सप्तमी , अष्टमी , नवमी ,दशमी , एकादशी , द्वादशी , त्रयोदशी , चतुर्दशी , पूर्णिमा , अमावष्या ! ( २४ ) स्मृतियां - मनु , विष्णु , अत्री , हारीत , याज्ञवल्क्य , उशना , अंगीरा , यम , आपस्तम्ब , सर्वत ,कात्यायन , ब्रहस्पति , पराशर , व्यास , शांख्य , लिखित , दक्ष , शातातप , वशिष्ठ ! ***************************** ॐ शाति ।। जय हिन्दी ।। जय संस्कृत ।।

वात-पित्त और कफ

सबसे पहले आप हमेशा ये बात याद रखें कि शरीर मे सारी बीमारियाँ वात-पित्त और कफ के बिगड़ने से ही होती हैं ! अब आप पूछेंगे ये वात-पित्त और कफ क्या होता है ??? बहुत ज्यादा गहराई मे जाने की जरूरत नहीं आप ऐसे समझे की सिर से लेकर छाती के बीच तक जितने रोग होते हैं वो सब कफ बिगड़ने के कारण होते हैं ! छाती के बीच से लेकर पेट और कमर के अंत तक जितने रोग होते हैं वो पित्त बिगड़ने के कारण होते हैं !और कमर से लेकर घुटने और पैरों के अंत तक जितने रोग होते हैं वो सब वात बिगड़ने के कारण होते हैं ! हमारे हाथ की कलाई मे ये वात-पित्त और कफ की तीन नाड़ियाँ होती हैं ! भारत मे ऐसे ऐसे नाड़ी विशेषज्ञ रहे हैं जो आपकी नाड़ी पकड़ कर ये बता दिया करते थे कि आपने एक सप्ताह पहले क्या खाया एक दिन पहले क्या खाया -दो पहले क्या खाया !! और नाड़ी पकड़ कर ही बता देते थे कि आपको क्या रोग है ! आजकल ऐसी बहुत ही कम मिलते हैं ! शायद आपके मन मे सवाल आए ये वात -पित्त कफ दिखने मे कैसे होते हैं ??? तो फिलहाल आप इतना जान लीजिये ! कफ और पित्त लगभग एक जैसे होते हैं ! आम भाषा मे नाक से निकलने वाली बलगम को कफ कहते हैं ! कफ थोड़ा गाढ़ा और चिपचिपा होता है ! मुंह मे से निकलने वाली बलगम को पित्त कहते हैं ! ये कम चिपचिपा और द्रव्य जैसा होता है !! और शरीर से निकले वाली वायु को वात कहते हैं !! ये अदृश्य होती है ! कई बार पेट मे गैस बनने के कारण सिर दर्द होता है तो इसे आप कफ का रोग नहीं कहेंगे इसे पित्त का रोग कहेंगे !! क्यूंकि पित्त बिगड़ने से गैस हो रही है और सिर दर्द हो रहा है ! ये ज्ञान बहुत गहरा है खैर आप इतना याद रखें कि इस वात -पित्त और कफ के संतुलन के बिगड़ने से ही सभी रोग आते हैं ! और ये तीनों ही मनुष्य की आयु के साथ अलग अलग ढंग से बढ़ते हैं ! बच्चे के पैदा होने से 14 वर्ष की आयु तक कफ के रोग ज्यादा होते है ! बार बार खांसी ,सर्दी ,छींके आना आदि होगा ! 14 वर्ष से 60 साल तक पित्त के रोग सबसे ज्यादा होते हैं बार बार पेट दर्द करना ,गैस बनना ,खट्टी खट्टी डकारे आना आदि !! और उसके बाद बुढ़ापे मे वात के रोग सबसे ज्यादा होते हैं घुटने दुखना ,जोड़ो का दर्द आदि _________________________ भारत मे 3 हजार साल पहले एक ऋषि हुए है उनका नाम था वाग्बट्ट ! उन्होने ने एक किताब लिखी जिसका नाम था अष्टांग हृदयं !! वो ऋषि 135 साल तक की आयु तक जीवित रहे थे ! अष्टांग हृदयं मे वाग्बट्टजी कहते हैं की जिंदगी मे वात्त,पित्त और कफ संतुलित रखना ही सबसे अच्छी कला है और कौशल्य है सारी जिंदगी प्रयास पूर्वक आपको एक ही काम करना है की हमारा वात्त,पित्त और कफ नियमित रहे,संतुलित रहे और सुरक्षित रहे|जितना चाहिए उतना वात्त रहे,जितना चाहिए उतना पित्त रहे और जितना चाहिए उतना कफ रहे|तो जितना चाहिए उतना वात्त,पित्त और कफ रहे उसके लिए क्या करना है उसके लिए उन्होने 7000 सूत्र लिखे हैं उस किताब मे ! उसमे सबसे महत्व पूर्ण और पहला सूत्र है : भोजनान्ते विषं वारी (मतलब खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है | ) अब समझते हैं क्या कहा वाग्बट्टजी ने !! कभी भी खाना खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना !! अब आप कहेंगे हम तो हमेशा यही करते हैं ! 99% लोग ऐसे होते है जो पानी लिए बिना खाना नहीं खाते है |पानी पहले होता है खाना बाद मे होता है |बहुत सारे लोग तो खाना खाने से ज्यादा पानी पीते है दो-चार रोटी के टुकडो को खाया फिर पानी पिया,फिर खाया-फिर पानी पिया ! ऐसी अवस्था मे वाग्बट्टजी बिलकुल ऐसी बात करते हे की पानी ही नहीं पीना खाना खाने के बाद ! कारण क्या ? क्यों नहीं पीना है ?? ये जानना बहुत जरुरी है ...हम पानी क्यों ना पीये खाना खाने के बाद क्या कारण है | बात ऐसी है की हमारा जो शरीर है शरीर का पूरा केंद्र है हमारा पेट|ये पूरा शरीर चलता है पेट की ताकत से और पेट चलता है भोजन की ताकत से|जो कुछ भी हम खाते है वो ही हमारे पेट की ताकत है |हमने दाल खाई,हमने सब्जी खाई, हमने रोटी खाई, हमने दही खाया लस्सी पी कुछ भी दूध,दही छाझ लस्सी फल आदि|ये सब कुछ भोजन के रूप मे हमने ग्रहण किया ये सब कुछ हमको उर्जा देता है और पेट उस उर्जा को आगे ट्रांसफर करता है |आप कुछ भी खाते है पेट उसके लिए उर्जा का आधार बनता है |अब हम खाते है तो पेट मे सब कुछ जाता है|पेट मे एक छोटा सा स्थान होता है जिसको हम हिंदी मे कहते है अमाशय|उसी स्थान का संस्कृत नाम है जठर|उसी स्थान को अंग्रेजी मे कहते है epigastrium |ये एक थेली की तरह होता है और यह जठर हमारे शरीर मे सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि सारा खाना सबसे पहले इसी मे आता है ये |बहुत छोटा सा स्थान हैं इसमें अधिक से अधिक 350GMS खाना आ सकता है |हम कुछ भी खाते सब ये अमाशय मे आ जाता है| अब अमाशय मे क्या होता है खाना जैसे ही पहुँचता है तो यह भगवान की बनाई हुई व्यवस्था है जो शरीर मे है की तुरंत इसमें आग(अग्नि) जल जाती है |आमाशय मे अग्नि प्रदीप्त होती है उसी को कहते हे जठराग्नि|ये जठराग्नि है वो अमाशय मे प्रदीप्त होने वाली आग है |ये आग ऐसी ही होती है जेसे रसोई गेस की आग|आप की रसोई गेस की आग है ना की जेसे आपने स्विच ओन किया आग जल गयी|ऐसे ही पेट मे होता है जेसे ही आपने खाना खाया की जठराग्नि प्रदीप्त हो गयी |यह ऑटोमेटिक है,जेसे ही अपने रोटी का पहला टुकड़ा मुँह मे डाला की इधर जठराग्नि प्रदीप्त हो गई|ये अग्नि तब तक जलती हे जब तक खाना पचता है |आपने खाना खाया और अग्नि जल गयी अब अग्नि खाने को पचाती है |वो ऐसे ही पचाती है जेसे रसोई गेस|आपने रसोई गेस पर बरतन रखकर थोडा दूध डाल दिया और उसमे चावल डाल दिया तो जब तक अग्नि जलेगी तब तक खीर बनेगी|इसी तरह अपने पानी डाल दिया और चावल डाल दिए तो जब तक अग्नि जलेगी चावल पकेगा| अब अपने खाते ही गटागट पानी पी लिया और खूब ठंडा पानी पी लिया|और कई लोग तो बोतल पे बोतल पी जाते है |अब होने वाला एक ही काम है जो आग(जठराग्नि) जल रही थी वो बुझ गयी|आग अगर बुझ गयी तो खाने की पचने की जो क्रिया है वो रुक गयी|अब हमेशा याद रखें खाना पचने पर हमारे पेट मे दो ही क्रिया होती है |एक क्रिया है जिसको हम कहते हे Digation और दूसरी है fermentation|फर्मेंटेशन का मतलब है सडना और डायजेशन का मतलब हे पचना| आयुर्वेद के हिसाब से आग जलेगी तो खाना पचेगा,खाना पचेगा तो उसका रस बनेगा|जो रस बनेगा तो उसी रस से मांस,मज्जा,रक्त,वीर्य,हड्डिया,मल,मूत्र और अस्थि बनेगा और सबसे अंत मे मेद बनेगा|ये तभी होगा जब खाना पचेगा| अब ध्यान से पढ़े इन् शब्दों को मांस की हमें जरुरत है हम सबको,मज्जा की जरुरत है ,रक्त की भी जरुरत है ,वीर्य की भी जरुरत है ,अस्थि भी चाहिए,मेद भी चाहिए|यह सब हमें चाहिए|जो नहीं चाहिए वो मल नहीं चाहिए और मूत्र नहीं चाहिए|मल और मूत्र बनेगा जरुर ! लेकिन वो हमें चाहिए नहीं तो शरीर हर दिन उसको छोड़ देगा|मल को भी छोड़ देगा और मूत्र को भी छोड़ देगा बाकि जो चाहिए शरीर उसको धारण कर लेगा| ये तो हुई खाना पचने की बात अब जब खाना सड़ेगा तब क्या होगा..? अगर आपने खाना खाने के तुरंत बाद पानी पी लिया तो जठराग्नि नहीं जलेगी,खाना नहीं पचेगा और वही खाना फिर सड़ेगा|और सड़ने के बाद उसमे जहर बनेंगे| खाने के सड़ने पर सबसे पहला जहर जो बनता है वो हे यूरिक एसिड(uric acid )|कई बार आप डॉक्टर के पास जाकर कहते है की मुझे घुटने मे दर्द हो रहा है ,मुझे कंधे-कमर मे दर्द हो रहा है तो डॉक्टर कहेगा आपका यूरिक एसिड बढ़ रहा है आप ये दवा खाओ,वो दवा खाओ यूरिक एसिड कम करो|यह यूरिक एसिड विष (जहर ) है और यह इतना खतरनाक विष है की अगर अपने इसको कन्ट्रोल नहीं किया तो ये आपके शरीर को उस स्थिति मे ले जा सकता है की आप एक कदम भी चल ना सके|आपको बिस्तर मे ही पड़े रहना पड़े पेशाब भी बिस्तर मे करनी पड़े और संडास भी बिस्तर मे ही करनी पड़े यूरिक एसिड इतना खतरनाक है |इस लिए यह इतना खराब विष हे नहीं बनना चाहिए | और एक दूसरा उदाहरण खाना जब सड़ता है तो यूरिक एसिड जेसा ही एक दूसरा विष बनता है जिसको हम कहते हे LDL (Low Density lipoprotive) माने खराब कोलेस्ट्रोल(cholesterol )|जब आप ब्लड प्रेशर(BP) चेक कराने डॉक्टर के पास जाते हैं तो वो आपको कहता है (HIGH BP )हाय बीपी है आप पूछोगे कारण बताओ? तो वो कहेगा कोलेस्ट्रोल बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है |आप ज्यादा पूछोगे की कोलेस्ट्रोल कौनसा बहुत है ? तो वो आपको कहेगा LDL बहुत है | इससे भी ज्यादा खतरनाक विष हे वो है VLDL(Very Low Density lipoprotive)|ये भी कोलेस्ट्रॉल जेसा ही विष है |अगर VLDL बहुत बढ़ गया तो आपको भगवान भी नहीं बचा सकता| खाना सड़ने पर और जो जहर बनते है उसमे एक ओर विष है जिसको अंग्रेजी मे हम कहते है triglycerides|जब भी डॉक्टर आपको कहे की आपका triglycerides बढ़ा हुआ हे तो समज लीजिए की आपके शरीर मे विष निर्माण हो रहा है | तो कोई यूरिक एसिड के नाम से कहे,कोई कोलेस्ट्रोल के नाम से कहे,कोई LDL - VLDL के नाम से कहे समज लीजिए की ये विष हे और ऐसे विष 103 है |ये सभी विष तब बनते है जब खाना सड़ता है | मतलब समझ लीजिए किसी का कोलेस्ट्रोल बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे ध्यान आना चाहिए की खाना पच नहीं रहा है ,कोई कहता हे मेराtriglycerides बहुत बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे डायग्नोसिस कर लीजिए आप ! की आपका खाना पच नहीं रहा है |कोई कहता है मेरा यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट लगना चाहिए समझने मे की खाना पच नहीं रहा है | क्योंकि खाना पचने पर इनमे से कोई भी जहर नहीं बनता|खाना पचने पर जो बनता है वो है मांस,मज्जा,रक्त,वीर्य,हड्डिया,मल,मूत्र,अस्थि और खाना नहीं पचने पर बनता है यूरिक एसिड,कोलेस्ट्रोल,LDL-VLDL| और यही आपके शरीर को रोगों का घर बनाते है ! पेट मे बनने वाला यही जहर जब ज्यादा बढ़कर खून मे आते है ! तो खून दिल की नाड़ियो मे से निकल नहीं पाता और रोज थोड़ा थोड़ा कचरा जो खून मे आया है इकट्ठा होता रहता है और एक दिन नाड़ी को ब्लॉक कर देता है जिसे आप heart attack कहते हैं ! तो हमें जिंदगी मे ध्यान इस बात पर देना है की जो हम खा रहे हे वो शरीर मे ठीक से पचना चाहिए और खाना ठीक से पचना चाहिए इसके लिए पेट मे ठीक से आग(जठराग्नि) प्रदीप्त होनी ही चाहिए|क्योंकि बिना आग के खाना पचता नहीं हे और खाना पकता भी नहीं है |रसोई मे आग नहीं हे आप कुछ नहीं पका सकते और पेट मे आग नहीं हे आप कुछ नहीं पचा सकते| महत्व की बात खाने को खाना नहीं खाने को पचाना है |आपने क्या खाया कितना खाया वो महत्व नहीं हे कोई कहता हे मैंने 100 ग्राम खाया,कोई कहता है मैंने 200 ग्राम खाया,कोई कहता है मैंने 300 ग्राम खाया वो कुछ महत्व का नहीं है लेकिन आपने पचाया कितना वो महत्व है |आपने 100 ग्राम खाया और 100 ग्राम पचाया बहुत अच्छा है |और अगर आपने 200 ग्राम खाया और सिर्फ 100 ग्राम पचाया वो बहुत बेकार है |आपने 300 ग्राम खाया और उसमे से 100 ग्राम भी पचा नहीं सके वो बहुत खराब है !! खाना पच नहीं रहा तो समझ लीजिये विष निर्माण हो रहा है शरीर में ! और यही सारी बीमारियो का कारण है ! तो खाना अच्छे से पचे इसके लिए वाग्भट्ट जी ने सूत्र दिया !! भोजनान्ते विषं वारी (मतलब खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है ) इसलिए खाने के तुरंत बाद पानी कभी मत पिये ! अब आपके मन मे सवाल आएगा कितनी देर तक नहीं पीना ??? तो 1 घंटे 48 मिनट तक नहीं पीना ! अब आप कहेंगे इसका क्या calculation हैं ?? बात ऐसी है ! जब हम खाना खाते हैं तो जठराग्नि द्वारा सब एक दूसरे मे मिक्स होता है और फिर खाना पेस्ट मे बदलता हैं है ! पेस्ट मे बदलने की क्रिया होने तक 1 घंटा 48 मिनट का समय लगता है ! उसके बाद जठराग्नि कम हो जाती है ! (बुझती तो नहीं लेकिन बहुत धीमी हो जाती है ) पेस्ट बनने के बाद शरीर मे रस बनने की परिक्रिया शुरू होती है ! तब हमारे शरीर को पानी की जरूरत होती हैं तब आप जितना इच्छा हो उतना पानी पिये !! जो बहुत मेहनती लोग है (खेत मे हल चलाने वाले ,रिक्शा खीचने वाले पत्थर तोड़ने वाले !! उनको 1 घंटे के बाद ही रस बनने लगता है उनको एक घंटे बाद पानी पीना चाहिए ! खाना खाने के बाद अगर कुछ पी सकते हैं उसमे तीन चीजे आती हैं !! 1) जूस 2) छाज (लस्सी) या दहीं ! 3) दूध सुबह खाने के बाद अगर तुरंत कुछ पीना है तो हमेशा जूस पिये ! दोपहर को दहीं खाये ! या लस्सी पिये ! और दूध हमेशा रात को पिये !! इन तीनों के क्रम को कभी उल्टा पुलटा न करे !!फल सुबह ही खाएं (ज्यादा से ज्यादा दोपहर 1 बजे तक ) ! दहीं या लस्सी दोपहर को दूध रात को ही पिये ! जूस या फल सुबह ,दहीं या लस्सी दोपहर , और दूध हमेशा रात को क्यूँ पीना चाहिए ?? ज्यादा विस्तार मे न जाते हुए आप बस इतना समझे कि इन तीनों को पचाने के लिए शरीर मे अलग अलग इंजाएम उत्पन होते है ! जूस या फल सुबह को पचाने के इंजाईम हमेशा सुबह उत्पन होते है इसी तरह दहीं और छाझ को पचाने वाले दोपहर को और दूध को पचाने वाले रात को !! शाम या रात को पिया हुआ जूस अगले दिन सिर्फ मूत्र के साथ flesh out होता है ! _________________ ये तो हुआ खाने के बाद पानी पीने के बारे मे अब आप कहेंगे खाना खाने के पहले कितने मिनट तक पानी पी सकते हैं ??? तो खाना खाने के 45 मिनट पहले तक आप पानी पी सकते हैं ! अब आप पूछेंगे ये 45 मिनट का calculation ???? बात ऐसी ही जब हम पानी पीते हैं तो वो शरीर के प्रत्येक अंग तक जाता है ! और अगर बच जाये तो 45 मिनट बाद मूत्र पिंड तक पहुंचता है ! तो पानी - पीने से मूत्र पिंड तक आने का समय 45 मिनट का है ! तो आप खाना खाने से 45 मिनट पहले ही पाने पिये ! तो यहाँ एक सूत्र समाप्त हुआ ! आपने पूरी post पढ़ी बहुत बहुत धन्यवाद !! इसका जरूर पालण करे ! अधिक अधिक लोगो को बताएं post share करे !! बहुत बहुत धन्यवाद ! यहाँ जरूर जरूर click करे !! http://www.youtube.com/watch?v=Dqugl872d-s

भारतीय अस्मिता जागृत करे

ज्यादा जानकारी के लिए भाई आर्य जितेंद्र जी का ये विडियो देखिये http://www.youtube.com/watch?v=-YQTeNwuTd4&feature=youtu.be ज्यादा जानकारी के लिए भाई आर्य जितेंद्र जी का ये विडियो देखिये http://www.youtube.com/watch?v=-YQTeNwuTd4&feature=youtu.be यूं तो भारत ने दुनिया को पढ़ना लिखना और जीवन जीना सिखाया है लेकिन कुछ अज्ञानी भारतीय जो भारत मे अपवाद बनकर पैदा हुए है वो कहते है की हम तो बंदर के अवतार है और ज्ञान तो भारत मे यूरोप से आया है उन काले अंग्रेज़ो की जानकारी के लिए मैं बता दूँ की भारत ने ही दुनिया को भौतिक जगत की हर सुख सुविधाए प्रदान की है चाहे वो टेलीफोन हो या हवाई जहाज आइये जाने टेलीफोन के बारे मे ------------- टेलीफोन का आविष्कार तो भारत मे करोडों वर्ष पहले ही हो गया था लेकिन भारत वासी इतने उच्च विज्ञान और गहन अनुसंधान मे लगे थे की ऐसी मामूली वस्तु का उनके जीवन मे कोई महत्व नहीं था इसलिए ऐसी तुच्छ तकनीकी का वे उपयोग नहीं करते थे लेकिन जब भारत पर अंग्रेज़ो ने राज किया तो भारत से वे ज्ञान और तकनीकी चुराने लग गए और अपने नाम से पेटेंट कराने लग गए वास्तव मे ये आविष्कार करोडों वर्ष पहले ही भारत मे हो चुके थे । आइये आधुनिक जगत मे टेलीफोन की बात भी करे तो टेलीफोन का आविष्कार ग्राहम बैल ने किया था लेकिन वास्तव में इसका आविष्कार प्रो. जगदीश चन्द्र बसु ने किया था. ग्राहम बैल और एलीशा ग्रे नाम के दो चोरो ने तो भारत के वैज्ञानिक जगदीश जी की थ्योरी चुराई है और जब भारत के वैज्ञानिक श्री जगदीश जी ने टेलीफोन का आविष्कार किया था तो हम भारतीय ग्राहम बैल की रखेल हैलो का नाम लेकर हमारे वैज्ञानिक श्री बॉस को क्यूँ गाली दे तो! आज से मानसिक गुलामी छोड़िए और फोन आते ही जो से बोलिए जय जगदीश .......................................... किसी काले अंग्रेज़ की आत्मा को इस बात से दुख पहुचा हो तो कृपया अमेरिका और यूरोप मे चला जाये भारत को छोड़कर ये भारत सिर्फ शालिन भारतीयो का देश है