श्री हनुमान चालीसा श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारीबरनौ रघुबर बिमल जसु, जो दायकू फल चारिबुध्दि हीन तनु जानिके सुमिरौ पवन कुमार |बल बुध्दि विद्या देहु मोंही , हरहु कलेश विकार || चोपाई जय हनुमान ज्ञान गुन सागर |जय कपीस तिहुं लोक उजागर ||राम दूत अतुलित बल धामा |अंजनी पुत्र पवन सुत नामा ||महाबीर बिक्रम बजरंगी|कुमति निवार सुमति के संगी ||कंचन बरन बिराज सुबेसा |कानन कुण्डल कुंचित केसा ||हाथ वज्र औ ध्वजा विराजे|काँधे मूंज जनेऊ साजे||संकर सुवन केसरी नंदन |तेज प्रताप महा जग बंदन||विद्यावान गुनी अति चातुर |राम काज करिबे को आतुर ||प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया |राम लखन सीता मन बसिया ||सुषम रूप धरी सियहि दिखावा |बिकट रूप धरी लंक जरावा ||भीम रूप धरी असुर संहारे |रामचंद्र के काज संवारे ||लाय संजीवन लखन जियाये |श्रीरघुवीर हरषि उर लाये ||रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई |तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ||सहस बदन तुम्हरो जस गावे |अस कही श्रीपति कंड लगावे ||सनकादिक ब्रह्मादी मुनीसा|नारद सारद सहित अहीसा ||जम कुबेर दिगपाल जहा ते|कबि कोबिद कही सके कहा ते||तुम उपकार सुग्रीवहीं कीन्हा |राम मिलाय रज पद दीन्हा ||तुम्हरो मंत्र विभेक्षण माना |लंकेश्वर भए सब जग जाना ||जुग सहस्र योजन पर भानू |लील्यो ताहि मधुर फल जाणू ||प्रभु मुद्रिका मेली मुख माहीं|जलधि लांघी गए अचरज नाहीं||दुर्गम काज जगत के जेते |सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ||राम दुआरे तुम रखवारे |होत न आग्यां बिनु पैसारे ||सब सुख लहै तुम्हारी सरना |तुम रक्षक काहू को डरना ||आपण तेज सम्हारो आपे |तीनों लोक हांक ते काँपे ||भुत पिसाच निकट नहिं आवो |महावीर जब नाम सुनावे ||नासौ रोग हरे सब पीरा |जपत निरंतर हनुमत बीरा ||संकट से हनुमान छुडावे |मन क्रम बचन ध्यान जो लावै||सब पर राम तपस्वी राजा |तिन के काज सकल तुम साजा ||और मनोरथ जो कोई लावे |सोई अमित जीवन फल पावे ||चारों जुग प्रताप तुम्हारा |है प्रसिद्ध जगत उजियारा ||साधु संत के तुम रखवारे |असुर निकंदन राम दुलारे ||अष्ट सिद्धि नौनिधि के दाता |अस बर दीन जानकी माता ||राम रसायन तुम्हरे पासा |सदा रहो रघुपति के दासा ||तुम्हरे भजन राम को पावे |जनम जनम के दुःख बिस्रावे ||अंत काल रघुबर पुर जाई |जहा जनम हरी भक्त कहाई ||और देवता चित्त न धरई |हनुमत सेई सर्व सुख करई||संकट कटे मिटे सब पीरा |जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ||जय जय जय हनुमान गोसाई |कृपा करहु गुरु देव के नाइ ||जो सत बार पाट कर कोई |छूटही बंदी महा सुख होई ||जो यहे पड़े हनुमान चालीसा |होय सिद्धि साखी गौरीसा ||तुलसीदास सदा हरी चेरा |कीजै नाथ हृदये मह डेरा || दोहापवन तनय संकट हरन, मंगल मूर्ति रूप |राम लखन सीता सहित , ह्रुदय बसहु सुर भूप ll
25 Dec 2014
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16 Dec 2014
स्वामी विवेकानंद
आज देश में युवाओं
की भागीदारी को लेकर बहस छिड़ी हुई
है. हर तरफ यही सवाल है कि आखिर हम
युवाओं को किस तरह विकास की राह में
अपना सारथी बना पाएंगे. इस सवाल
का एक जवाब हो सकता है
कि युवा अपना आदर्श ऐसे
लोगों को बनाएं जो वाकई
जमीनी स्तर पर युवाओं के लिए कर्तव्यबद्ध
होते हैं. ऐसे ही एक अहम आदर्श हैं
स्वामी विवेकानंद.
Swami Vivekananda Quote
स्वामी विवेकानंद आधुनिक भारत के एक
क्रांतिकारी विचारक माने जाते हैं. 12
जनवरी, 1863 को कलकत्ता में जन्मे
स्वामी विवेकानंद के बचपन का नाम नरेंद्र
नाथ था. इन्होंने अपने बचपन में
ही परमात्मा को जानने की तीव्र
जिज्ञासावश तलाश आरंभ कर दी.
इसी क्रम में उन्होंने सन 1881 में पहली बार
रामकृष्ण परमहंस से भेंट की और उन्हें
अपना गुरु स्वीकार कर
लिया तथा अध्यात्म-यात्रा पर चल पड़े.
काली मां के अनन्य भक्त
स्वामी विवेकानंद ने आगे चलकर अद्वैत
वेदांत के आधार पर सारे जगत को आत्म-रूप
बताया और कहा कि “आत्मा को हम देख
नहीं सकते किंतु अनुभव कर सकते हैं. यह
आत्मा जगत के सर्वांश में व्याप्त है. सारे
जगत का जन्म उसी से होता है, फिर वह
उसी में विलीन हो जाता है. उन्होंने धर्म
को मनुष्य, समाज और राष्ट्र निर्माण के
लिए स्वीकार किया और कहा कि धर्म
मनुष्य के लिए है, मनुष्य धर्म के लिए नहीं.
भारतीय जन के लिए, विशेषकर युवाओं के
लिए उन का नारा था – “उठो, जागो
और लक्ष्य की प्राप्ति होने तक
रुको मत.”
Swami Vivekananda speech in
Chicago
31 मई, 1883 को वह अमेरिका गए. 11
सितंबर, 1883 में शिकागो के विश्व धर्म
सम्मेलन में उपस्थित होकर अपने संबोधन में
सबको भाइयों और बहनों कह कर
संबोधित किया. इस आत्मीय संबोधन पर
मुग्ध होकर सब बड़ी देर तक
तालियां बजाते रहे. वहीं उन्होंने शून्य
को ब्रह्म सिद्ध किया और भारतीय धर्म
दर्शन अद्वैत वेदांत
की श्रेष्ठता का डंका बजाया.
उनका कहना था कि आत्मा से पृथक करके
जब हम किसी व्यक्ति या वस्तु से प्रेम
करते हैं, तो उसका फल शोक या दुख
होता है. अत: हमें सभी वस्तुओं का उपयोग
उन्हें आत्मा के अंतर्गत मान कर
करना चाहिए या आत्म-स्वरूप मान कर
करना चाहिए ताकि हमें कष्ट या दुख न
हो.
अमेरिका में चार वर्ष रहकर वह धर्म-प्रचार
करते रहे तथा 1887 में भारत लौट आए.
भारतीय धर्म-दर्शन का वास्तविक स्वरूप
और किसी भी देश की अस्थिमज्जा माने
जाने वाले युवकों के कर्तव्यों का रेखांकन
कर स्वामी विवेकानंद सम्पूर्ण विश्व के
‘जननायक‘ बन गए.
Swami Vivekananda’s quote
फिर बाद में विवेकानंद ने 18 नवंबर,1896
को लंदन में अपने एक व्याख्यान में
कहा था, मनुष्य
जितना स्वार्थी होता है,
उतना ही अनैतिक भी होता है.
उनका स्पष्ट संकेत अंग्रेजों के लिए था,
किंतु आज यह कथन भारतीय समाज के
लिए भी कितना अधिक सत्य सिद्ध
हो रहा है.
Swami Vivekananda’s quote on
Freedom
पराधीन भारतीय समाज को उन्होंने
स्वार्थ, प्रमाद व कायरता की नींद से
झकझोर कर जगाया और कहा कि मैं एक
हजार बार सहर्ष नरक में जाने को तैयार हूं
यदि इससे अपने देशवासियों का जीवन-
स्तर थोडा-सा भी उठा सकूं.
स्वामी विवेकानंद ने अपनी ओजपूर्ण
वाणी से हमेशा भारतीय युवाओं
को उत्साहित किया है. उनके उपदेश आज
भी संपूर्ण मानव जाति में
शक्ति का संचार करते है. उनके अनुसार,
किसी भी इंसान को असफलताओं
को धूल के समान झटक कर फेंक
देना चाहिए, तभी सफलता उनके करीब
आती है. स्वामी जी के शब्दों में ‘हमें
किसी भी परिस्थिति में अपने लक्ष्य से
भटकना नहीं चाहिए‘.
Swami Vivekananda’s Death
स्वामी विवेकानंद ने अशिक्षा, अज्ञान,
गरीबी तथा भूख से लडने के लिए अपने
समाज को तैयार किया और साथ
ही उन्होंने राष्ट्रीय चेतना जगाने,
सांप्रदायिकता मिटाने,
मानवतावादी संवेदनशील समाज बनाने
के लिए एक आध्यात्मिक नायक
की भूमिका भी निभाई. 4 जुलाई, 1902
को कुल 39 वर्ष की आयु में विवेकानंद
जी का निधन हो गया. इतनी कम उम्र में
भी उन्होंने अपने जीवन को उस श्रेणी में
ला खड़ा किया जहां वह मरकर भी अमर
हो गए.
जब-जब मानवता निराश एवं हताश
होगी, तब-तब स्वामी विवेकानंद के
उत्साही, ओजस्वी एवं अनंत ऊर्जा से भरपूर
विचार जन-जन को प्रेरणा देते रहेंगे और
कहते रहेंगे- ‘उठो जागो और अपने लक्ष्य
की प्राप्ति से पूर्व मत रुको.’
13 Dec 2014
Mathematics formula:
(α+в+¢)²= α²+в²+¢²+2(αв+в¢+¢α)
1. (α+в)²= α²+2αв+в²
2. (α+в)²= (α-в)²+4αв b
3. (α-в)²= α²-2αв+в²
4. (α-в)²= f(α+в)²-4αв
5. α² + в²= (α+в)² - 2αв.
6. α² + в²= (α-в)² + 2αв.
7. α²-в² =(α + в)(α - в)
8. 2(α² + в²) = (α+ в)² + (α - в)²
9. 4αв = (α + в)² -(α-в)²
10. αв ={(α+в)/2}²-{(α-в)/2}²
11. (α + в + ¢)² = α² + в² + ¢² + 2(αв + в¢ + ¢α)
12. (α + в)³ = α³ + 3α²в + 3αв² + в³
13. (α + в)³ = α³ + в³ + 3αв(α + в)
14. (α-в)³=α³-3α²в+3αв²-в³
15. α³ + в³ = (α + в) (α² -αв + в²)
16. α³ + в³ = (α+ в)³ -3αв(α+ в)
17. α³ -в³ = (α -в) (α² + αв + в²)
18. α³ -в³ = (α-в)³ + 3αв(α-в)
ѕιη0° =0
ѕιη30° = 1/2
ѕιη45° = 1/√2
ѕιη60° = √3/2
ѕιη90° = 1
¢σѕ ιѕ σρρσѕιтє σƒ ѕιη
тαη0° = 0
тαη30° = 1/√3
тαη45° = 1
тαη60° = √3
тαη90° = ∞
¢σт ιѕ σρρσѕιтє σƒ тαη
ѕє¢0° = 1
ѕє¢30° = 2/√3
ѕє¢45° = √2
ѕє¢60° = 2
ѕє¢90° = ∞
¢σѕє¢ ιѕ σρρσѕιтє σƒ ѕє¢
2ѕιηα¢σѕв=ѕιη(α+в)+ѕιη(α-в)
2¢σѕαѕιηв=ѕιη(α+в)-ѕιη(α-в)
2¢σѕα¢σѕв=¢σѕ(α+в)+¢σѕ(α-в)
2ѕιηαѕιηв=¢σѕ(α-в)-¢σѕ(α+в)
ѕιη(α+в)=ѕιηα ¢σѕв+ ¢σѕα ѕιηв.
» ¢σѕ(α+в)=¢σѕα ¢σѕв - ѕιηα ѕιηв.
» ѕιη(α-в)=ѕιηα¢σѕв-¢σѕαѕιηв.
» ¢σѕ(α-в)=¢σѕα¢σѕв+ѕιηαѕιηв.
» тαη(α+в)= (тαηα + тαηв)/ (1−тαηαтαηв)
» тαη(α−в)= (тαηα − тαηв) / (1+ тαηαтαηв)
» ¢σт(α+в)= (¢σтα¢σтв −1) / (¢σтα + ¢σтв)
» ¢σт(α−в)= (¢σтα¢σтв + 1) / (¢σтв− ¢σтα)
» ѕιη(α+в)=ѕιηα ¢σѕв+ ¢σѕα ѕιηв.
» ¢σѕ(α+в)=¢σѕα ¢σѕв +ѕιηα ѕιηв.
» ѕιη(α-в)=ѕιηα¢σѕв-¢σѕαѕιηв.
» ¢σѕ(α-в)=¢σѕα¢σѕв+ѕιηαѕιηв.
» тαη(α+в)= (тαηα + тαηв)/ (1−тαηαтαηв)
» тαη(α−в)= (тαηα − тαηв) / (1+ тαηαтαηв)
» ¢σт(α+в)= (¢σтα¢σтв −1) / (¢σтα + ¢σтв)
» ¢σт(α−в)= (¢σтα¢σтв + 1) / (¢σтв− ¢σтα)
α/ѕιηα = в/ѕιηв = ¢/ѕιη¢ = 2я
» α = в ¢σѕ¢ + ¢ ¢σѕв
» в = α ¢σѕ¢ + ¢ ¢σѕα
» ¢ = α ¢σѕв + в ¢σѕα
» ¢σѕα = (в² + ¢²− α²) / 2в¢
» ¢σѕв = (¢² + α²− в²) / 2¢α
» ¢σѕ¢ = (α² + в²− ¢²) / 2¢α
» Δ = αв¢/4я
» ѕιηΘ = 0 тнєη,Θ = ηΠ
» ѕιηΘ = 1 тнєη,Θ = (4η + 1)Π/2
» ѕιηΘ =−1 тнєη,Θ = (4η− 1)Π/2
» ѕιηΘ = ѕιηα тнєη,Θ = ηΠ (−1)^ηα
1. ѕιη2α = 2ѕιηα¢σѕα
2. ¢σѕ2α = ¢σѕ²α − ѕιη²α
3. ¢σѕ2α = 2¢σѕ²α − 1
4. ¢σѕ2α = 1 − ѕιη²α
5. 2ѕιη²α = 1 − ¢σѕ2α
6. 1 + ѕιη2α = (ѕιηα + ¢σѕα)²
7. 1 − ѕιη2α = (ѕιηα − ¢σѕα)²
8. тαη2α = 2тαηα / (1 − тαη²α)
9. ѕιη2α = / (1 + тαη²α)
10. ¢σѕ2α = (1 − тαη²α) / (1 + тαη²α)
11. 4ѕιη³α = 3ѕιηα − ѕιη3α
12. 4¢σѕ³α = 3¢σѕα + ¢σѕ3α
🍄🍄🍄🍄🍄
» ѕιη²Θ+¢σѕ²Θ=1
» ѕє¢²Θ-тαη²Θ=1
» ¢σѕє¢²Θ-¢σт²Θ=1
» ѕιηΘ=1/¢σѕє¢Θ
» ¢σѕє¢Θ=1/ѕιηΘ
» ¢σѕΘ=1/ѕє¢Θ
» ѕє¢Θ=1/¢σѕΘ
» тαηΘ=1/¢σтΘ
» ¢σтΘ=1/тαηΘ
» тαηΘ=ѕιηΘ/¢σѕΘ
🌿
12 Dec 2014
NEW LIST OF R.T.O 2015
GJ-1Ahmedabad
GJ-2Mehsana
GJ-3Rajkot
GJ-4Bhavnagar
GJ-5Surat City
GJ-6Vadodara City
GJ-7Kheda
GJ-8Banaskantha (Palanpur)
GJ-9Sabarkantha (Himmatnagar)
GJ-10Jamnagar
GJ-11Junagadh
GJ-12Kutch
GJ-13Surendranagar
GJ-14Amreli / Rajula
GJ-15Valsad
GJ-16Bharuch
GJ-17Panchmahal (Godhara)
GJ-18Gandhinagar
GJ-19Bardoli
GJ-20Dahod
GJ-21Navsari
GJ-22Narmada
GJ-23Anand
GJ-24Patan
GJ-25Porbandar (Sudamapuri)
GJ-26Vyara
GJ-27Ahmedabad East (Vastral)
GJ-28Surat rural
GJ-29Vadodara rural
GJ-30Dang
GJ-31Gandhidham
GJ-32Botad
GJ-33Modasa (arrvali)
GJ-34Dwarka
GJ-35Mahisagar
GJ-36Morbi
GJ-37 Chhota Udaipur....
. .............
......FORWARD TO ALL GROUPS AND FRIENDZ...........
भारत के सभी राज्यों के वर्तमान मुख्यमंत्री
**********************************************
राज्य ---- मुख्यमंत्री
तेलंगाना ----- के चंद्रशेखर राव
आन्ध्र प्रदेश ---- चन्द्रबाबू नायडू
अरुणाचल प्रदेश ---- नबम तुकी
असम ---- तरुण गोगोई
बिहार ----- जीतम राम मांझी
छत्तीसढ ---- रमन सिंह
दिल्ली ------ राष्ट्रपति शासन
गोआ ----- मनोहर पारिकर
गुजरात ----- आनंदीबेन पटेल
हरियाणा ----- भूपिंन्दर सिंह हुड्डा
हिमाचल प्रदेश ----- वीरभद्र सिंह
जम्मू और कश्मीर ----- उमर अब्दुल्ला
झारखण्ड ---- हेमन्त सोरेन
कर्नाटक ----- सिद्धारैया
केरल ------ ओमान चांदी
मध्य प्रदेश ------ शिवराज सिंह चौहान
महाराष्ट्र ----- पृथ्वी राज चव्हाण
मणिपुर ----- ओकराम इबोई सिंह
मेघालय ----- मुकुल संगमा
मिज़ोरम पु ----- ललथानवाला
नागालैण्ड ----- टी आर जेलियांग
ओडिशा ----- नवीन पटनायक
पॉण्डिचेरी ---- एन. रंगास्वामी
पंजाब ---- प्रकाश सिंह बादल
राजस्थान ---- वसुंधरा राजे सिंधिया
सिक्किम ---- पवन कुमार चामलिंग
तमिलनाडु ----- जयललिता
त्रिपुरा ------ माणिक सरकार
उत्तराखण्ड ------ हरीश रावत
उत्तर प्रदेश ------ अखिलेश यादव
पश्चिम बंगाल ------ ममता बनर्जी
[11:40am, 08/08/2014] +91 94 28 138821: Full Form💡
👉A.M. — Ante meridian
👉P.M. — Post meridian
👉B. A. — Bachelor of Arts
👉M. A. — Master of Arts
👉B. Sc. — Bachelor of Science
👉M. Sc. — Master of Science
👉B. Sc. Ag. — Bachelor of Science in
Agriculture
👉M. Sc. Ag. — Master of Science in Agriculture
M. B. B. S. — Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery
👉M. D. — Doctor of Medicine
👉M. S. — Master of Surgery
👉Ph. D. / D. Phil. — Doctor of Philosophy (Arts & Science)
👉D. Litt./Lit. — Doctor of Literature / Doctor of Letters
👉D. Sc. — Doctor of Science
👉B. Com. — Bachelor of Commerce
👉M. Com. — Master of Commerce
👉Dr. — Doctor
👉B. P. — Blood Pressure
👉Mr. — Mister
👉Mrs. — Mistress
👉M.S. — miss (used for female married & unmarried)
👉Miss — used before unmarried girls)
👉M. P. — Member of Parliament
👉M. L. A. — Member of Legislative Assembly
👉M. L. C. — Member of Legislative Council
👉P. M. — Prime Minister
👉C. M. — Chief Minister
👉C-in-C — Commander-In-Chief
👉L. D. C. — Lower Division Clerk
👉U. D. C. — Upper Division Clerk
👉Lt. Gov. — Lieutenant Governor
👉D. M. — District Magistrate
👉V. I. P. — Very Important Person
👉I. T. O. — Income Tax Officer
👉C. I. D. — Criminal Investigation Department
👉C/o — Care of
👉S/o — Son of
👉C. B. I. — Central Bureau of Investigation
👉G. P. O. — General Post Office
👉H. Q. — Head Quarters
👉E. O. E. — Errors and Omissions Excepted
👉Kg. — Kilogram
👉Kw. — Kilowatts
👉Gm. — Gram
👉Km. — Kilometer
👉Ltd. — Limited
👉M. P. H. — Miles Per Hour
👉KM. P. H. — Kilometre Per Hour
👉P. T. O. — Please Turn Over
👉P. W. D. — Public Works Department
👉C. P. W. D. — Central Public Works Department
👉U. S. A. — United States of America
👉U. K. — United Kingdom (England)
👉U. P. — Uttar Pradesh
👉M. P. — Madhya Pradesh
👉H. P. — Himachal Pradesh
👉U. N. O. — United Nations Organization
👉W. H. O. — World Health Organization
👉B. B. C. — British Broadcasting Corporation
👉B. C. — Before Christ
👉A. C. — Air Conditioned
👉I. G. — Inspector General (of Police)
👉D. I. G. — Deputy Inspector General (of Police)
👉S. S. P. — Senior Superintendent of Police
👉D. S. P. — Deputy Superintendent of Police
👉S. D. M. — Sub-Divisional Magistrate
👉S. M. — Station Master
👉A. S. M. — Assistant Station Master
👉V. C. — Vice-Chancellor
👉A. G. — Accountant General
👉C. R. — Confidential Report
👉I. A. S. — Indian Administrative Service
👉I. P. S. — Indian Police Service
👉I. F. S. — Indian Foreign Service or Indian
Forest Service
I. R. S. — Indian Revenue Service
👉P. C. S. — Provincial Civil Service
👉M. E. S. — Military Engineering Service
Full Form Of Some technical Words
VIRUS - Vital Information Resource
UnderSeized.
3G -3rd Generation.
GSM - Global System for Mobile
Communication.
CDMA - Code Divison Multiple
Access.
UMTS - Universal MobileTelecommunication
System.
SIM - Subscriber Identity Module .
AVI = Audio Video Interleave
RTS = Real Time Streaming
SIS = Symbian
OS Installer File
AMR = Adaptive Multi-Rate Codec
JAD = Java Application Descriptor
JAR = Java Archive
JAD = Java Application Descriptor
3GPP = 3rd Generation Partnership Project
3GP = 3rd Generation Project
MP3 = MPEG player lll
MP4 = MPEG-4 video file
AAC = Advanced Audio Coding
GIF= Graphic InterchangeableFormat
JPEG = Joint Photographic Expert Group
JPEG = Joint Photographic Expert Group
BMP = Bitmap
SWF = Shock Wave Flash
WMV = Windows Media Video
WMA = Windows Media Audio
WAV = Waveform Audio
PNG = Portable Network Graphics
DOC =Document (MicrosoftCorporation)
PDF = Portable Document Format
M3G = Mobile 3D Graphics
M4A = MPEG-4 Audio File
NTH = Nokia Theme (series 40)
THM = Themes (Sony Ericsson)
MMF =
Synthetic Music Mobile Application File
NRT = Nokia Ringtone
XMF = Extensible Music File
WBMP = Wireless Bitmap Image
DVX = DivX Video
HTML = Hyper Text Markup Language
WML =
Wireless Markup Language
CD -Compact Disk.
☀ DVD - Digital Versatile Disk.
☀ CRT - Cathode Ray Tube.
☀ DAT - Digital Audio Tape.
☀ DOS - Disk Operating System.
☀ GUI -Graphical
User Interface.
☀ HTTP - Hyper Text Transfer Protocol.
☀ IP - Internet Protocol.
☀ ISP - Internet Service Provider.
☀ TCP - Transmission Control Protocol.
☀ UPS - UninterruptiblePower Supply.
☀ HSDPA -High Speed Downlink PacketAccess.
☀ EDGE - Enhanced Data Rate for
☀ GSM- [GlobalSystem for Mobile
Communication]
Evolution.
☀ VHF - Very High Frequency.
☀ UHF - Ultra High Frequency.
☀ GPRS - General
PacketRadio Service.
☀ WAP - Wireless ApplicationProtocol.
☀ TCP - Transmission ControlProtocol.
☀ ARPANET - Advanced Research Project
Agency Network.
☀ IBM - International Business Machines.
☀ HP - Hewlett Packard.
☀ AM/FM - Amplitude/ Frequency Modulation.
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6 Dec 2014
पाँच पाण्डव तथा सौ कौरवों के नाम ये थे :– पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं -
पाँच पाण्डव तथा सौ कौरवों के नाम ये थे :–
पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं -
1. युधिष्ठिर
2. भीम
3. अर्जुन
4. नकुल
5. सहदेव
( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण
भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु
उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है )
यहाँ ध्यान रखें कि… पाण्डु के उपरोक्त
पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन
की माता कुन्ती थीं ……तथा , नकुल और सहदेव
की माता माद्री थी ।
वहीँ …. धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र…..
कौरव कहलाए जिनके नाम हैं -
1. दुर्योधन
2. दुःशासन
3. दुःसह
4. दुःशल
5. जलसंघ
6. सम
7. सह
8. विंद
9. अनुविंद
10. दुर्धर्ष
11. सुबाहु
12. दुषप्रधर्षण
13. दुर्मर्षण
14. दुर्मुख
15. दुष्कर्ण
16. विकर्ण
17. शल
18. सत्वान
19. सुलोचन
20. चित्र
21. उपचित्र
22. चित्राक्ष
23. चारुचित्र
24. शरासन
25. दुर्मद
26. दुर्विगाह
27. विवित्सु
28. विकटानन्द
29. ऊर्णनाभ
30. सुनाभ
31. नन्द
32. उपनन्द
33. चित्रबाण
34. चित्रवर्मा
35. सुवर्मा
36. दुर्विमोचन
37. अयोबाहु
38. महाबाहु
39. चित्रांग
40. चित्रकुण्डल
41. भीमवेग
42. भीमबल
43. बालाकि
44. बलवर्धन
45. उग्रायुध
46. सुषेण
47. कुण्डधर
48. महोदर
49. चित्रायुध
50. निषंगी
51. पाशी
52. वृन्दारक
53. दृढ़वर्मा
54. दृढ़क्षत्र
55. सोमकीर्ति
56. अनूदर
57. दढ़संघ
58. जरासंघ
59. सत्यसंघ
60. सद्सुवाक
61. उग्रश्रवा
62. उग्रसेन
63. सेनानी
64. दुष्पराजय
65. अपराजित
66. कुण्डशायी
67. विशालाक्ष
68. दुराधर
69. दृढ़हस्त
70. सुहस्त
71. वातवेग
72. सुवर्च
73. आदित्यकेतु
74. बह्वाशी
75. नागदत्त
76. उग्रशायी
77. कवचि
78. क्रथन
79. कुण्डी
80. भीमविक्र
81. धनुर्धर
82. वीरबाहु
83. अलोलुप
84. अभय
85. दृढ़कर्मा
86. दृढ़रथाश्रय
87. अनाधृष्य
88. कुण्डभेदी
89. विरवि
90. चित्रकुण्डल
91. प्रधम
92. अमाप्रमाथि
93. दीर्घरोमा
94. सुवीर्यवान
95. दीर्घबाहु
96. सुजात
97. कनकध्वज
98. कुण्डाशी
99. विरज
100. युयुत्सु
( इन 100 भाइयों के अलावा कौरवों की एक बहन
भी थी… जिसका नाम""दुशाला""था,
जिसका विवाह"जयद्रथ"सेहुआ था )
"श्री मद्-भगवत गीता"
के बारे में-
किसको किसने सुनाई?
उ.- श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई।
कब सुनाई?
उ.- आज से लगभग 7 हज़ार साल पहले सुनाई।
भगवान ने किस दिन गीता सुनाई?
उ.- रविवार के दिन।
कोनसी तिथि को?
उ.- एकादशी
कहा सुनाई?
उ.- कुरुक्षेत्र की रणभूमि में।
कितनी देर में सुनाई?
उ.- लगभग 45 मिनट में
क्यू सुनाई?
उ.- कर्त्तव्य से भटके हुए अर्जुन को कर्त्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढियों को धर्म-ज्ञान सिखाने के लिए।
कितने अध्याय है?
उ.- कुल 18 अध्याय
कितने श्लोक है?
उ.- 700 श्लोक
गीता में क्या-क्या बताया गया है?
उ.- ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है, इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है।
गीता को अर्जुन के अलावा
और किन किन लोगो ने सुना?
उ.- धृतराष्ट्र एवं संजय ने
अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान किन्हें मिला था?
उ.- भगवान सूर्यदेव को
गीता की गिनती किन धर्म-ग्रंथो में आती है?
उ.- उपनिषदों में
गीता किस महाग्रंथ का भाग है....?
उ.- गीता महाभारत के एक अध्याय शांति-पर्व का एक हिस्सा है।
गीता का दूसरा नाम क्या है?
उ.- गीतोपनिषद
गीता का सार क्या है?
उ.- प्रभु श्रीकृष्ण की शरण लेना
गीता में किसने कितने श्लोक कहे है?
उ.- श्रीकृष्ण ने- 574
अर्जुन ने- 85
धृतराष्ट्र ने- 1
संजय ने- 40.
uhh
अपनी युवा-पीढ़ी को गीता जी के बारे में जानकारी पहुचाने हेतु इसे ज्यादा से ज्यादा शेअर करे। धन्यवाद
अधूरा ज्ञान खतरना होता है।
33 करोड नहीँ 33 कोटि देवी देवता हैँ हिँदू
धर्म मेँ। कोटि = प्रकार। देवभाषा संस्कृत में
कोटि के दो अर्थ होते है, कोटि का मतलब
प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़
भी होता। हिन्दू धर्म का दुष्प्रचार करने के
लिए ये बात उडाई गयी की हिन्दुओ के 33
करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू
खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़
देवी देवता हैं........
कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मेँ:
12 प्रकार हैँ आदित्य: , धाता, मित, आर्यमा,
शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष,
सविता, तवास्था, और विष्णु...! 8 प्रकार हैँ
वासु:, धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष
और प्रभाष। 11 प्रकार हैँ- रुद्र: ,हर,
बहुरुप,त्रयँबक,
अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी,
रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली। एवँ
दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार।
कुल: 12+8+11+2=33
अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है
तो इस जानकारी को अधिक से अधिक
लोगो तक पहुचाएं।
1 Dec 2014
तुलसी के गुण
तुलसी की है ये एक महिमा.....!
* तुलसी के निकट जिस मन्त्र-स्तोत्र आदि का जप-पाठ
किया जाता है, वश सब अनंत गुना फल देनेवाला होता है |
* प्रेत, पिशाच, ब्रह्मराक्षस, भूत, दैत्य आदि सब
तुलसी के पौधे से दूर भागते है |
* ब्रह्महत्या आदि पाप तथा पाप और खोटे विचार से उत्पन्न
होनेवाले रोग तुलसी के सामीप्य एवं सेवन से
नष्ट हो जाते है |
* तुलसी का पूजन, रोपण व धारण पाप को जलाता है और
स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदायक है |
* श्राद्ध और यज्ञ आदि कार्यों में तुलसी का एक
पत्ता भी महान पुण्य देनेवाला है |
* जो चोटी में तुलसी स्थापित करके
प्राणों का परित्याग करता है, वह पापराशि से मुक्त हो जाता है
|
* तुलसी के नाम-उच्चारण से मनुष्य के पाप नष्ट
हो जाते हैं तथा अक्षय पुण्य
की प्राप्ति होती है |
* तुलसी ग्रहण करके मनुष्य पातकों से मुक्त
हो जाता है |
* तुलसी पत्ते से टपकता हुआ जल जो अपने सिर पर
धारण करता है, उसे गंगास्नान और १० गोदान का फल प्राप्त
होता है |
*आदिवासियों द्वारा शिवलिंगी के
बीजों को तुलसी और गुड़ के साथ
पीसकर नि:संतान महिला को खिलाया जाता है,
महिला को जल्द ही संतान सुख
की प्राप्ति होती है।
*औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी के रस में
थाइमोल तत्व पाया जाता है जिससे त्वचा के रोगों में लाभ
होता है।
पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार
तुलसी के पत्तों को त्वचा पर रगड़ दिया जाए तो त्वचा पर
किसी भी तरह के संक्रमण में आराम
मिलता है।
*किडनी की पथरी में
तुलसी की पत्तियों को उबालकर
बनाया गया काढ़ा शहद के साथ नियमित 6 माह सेवन करने से
पथरी मूत्र मार्ग से बाहर निकल आती है।
*दिल की बीमारी में यह वरदान
साबित होती है क्योंकि यह खून में कोलेस्ट्राल
को नियंत्रित करती है। जिन्हें हॄदयाघात हुआ हो,
उन्हें तुलसी के रस का सेवन नियमित रूप से
करना चाहिए। तुलसी और हल्दी के
पानी का सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्राल
की मात्रा नियंत्रित रहती है और इसे कोई
भी स्वस्थ वयक्ति सेवन में ला सकता है।
*इसकी पत्तियों का रस निकाल कर बराबर मात्रा में
नींबू का रस मिलायें और रात को चेहरे पर लगाये
तो झाईयां नहीं रहती,
फुंसियां ठीक होती है और चेहरे
की रंगत में निखार आता है।
*फ्लू रोग तुलसी के पत्तों का काढ़ा, सेंधा नमक मिलाकर
पीने से ठीक होता है। डाँग- गुजरात में
आदिवासी हर्बल जानकार फ्लु के दौरान बुखार से ग्रस्त
रोगी को तुलसी और सेंधा नमक लेने
की सलाह देते हैं।
*माइग्रेन" के निवारण में मदद मिलती है। प्रतिदिन दिन में
4-5 बार तुलसी से 6-8 पत्तियों को चबाने से कुछ
ही दिनों में माईग्रेन की समस्या में आराम
मिलने लगता है।