21 Sept 2015

स्वामी विवेकानंद का एक प्रसंग

खुशबू  को  फैलने  का  बहुत  शौक है मगर
ये मुमकिन नही हवाओं से रिश्ता किए बग़ैर !"
मित्रों इस संवाद को ध्यान से पढ़ें और
मनन भी करें।

🙏
एक संवाद......

👇

मुशीं फैज अली ने स्वामी विवेकानन्द से पूछा :
"स्वामी जी हमें बताया गया है कि अल्लहा एक ही है। 
यदि वह एक ही है, तो फिर संसार उसी ने बनाया होगा ?

"स्वामी जी बोले, "सत्य है।".

मुशी जी बोले ,"तो फिर इतने प्रकार के मनुष्य क्यों बनाये। 
जैसे कि हिन्दु, मुसलमान, सिख्ख, ईसाइ और सभी को अलग-अलग धार्मिक ग्रंथ भी दिये।
एक ही जैसे इंसान बनाने में उसे यानि की अल्लाह को क्या एतराज था।
सब एक होते तो न कोई लङाई और न कोई झगङा होता।

".स्वामी हँसते हुए बोले, "मुंशी जी वो सृष्टी कैसी होती जिसमें एक ही प्रकार के फूल होते।

केवल गुलाब होता, कमल या रंजनिगंधा या गेंदा जैसे फूल न होते!".

फैज अली ने कहा सच कहा आपने
यदि
एक ही दाल होती
तो
खाने का स्वाद भी
एक ही होता। 

दुनिया तो
बङी फीकी सी हो जाती!

स्वामी जी ने कहा, मुंशीजी! इसीलिये तो ऊपर वाले ने अनेक प्रकार के जीव-जंतु और इंसान बनाए
ताकि हम
पिंजरे का भेद भूलकर
जीव की एकता को पहचाने।

मुशी जी ने पूछा,
इतने मजहब क्यों ?

स्वामी जी ने कहा, " मजहब तो मनुष्य ने बनाए हैं,
प्रभु ने तो केवल धर्म बनाया है।

"मुशी जी ने कहा कि, " ऐसा क्यों है कि
एक मजहब में कहा गया है कि गाय और सुअर खाओ
और
दूसरे में कहा गया है कि
गाय मत खाओ, सुअर खाओ एवं तीसरे में कहा गया कि
गाय खाओ सुअर न खाओ;

इतना ही नही कुछ लोग तो ये भी कहते हैं कि मना करने पर जो इसे खाये उसे अपना दुश्मन समझो।"

स्वामी जी जोर से हँसते हुए मुंशी जी से पूछे कि ,"क्या ये सब प्रभु ने कहा है ?"

मुंशी जी बोले नही,"मजहबी लोग यही कहते हैं।"

स्वामी जी बोले,
"मित्र!
किसी भी देश या प्रदेश का भोजन
वहाँ की जलवायु की देन है। 

सागरतट पर बसने वाला व्यक्ति वहाँ खेती नही कर सकता,
वह
सागर से पकङ कर
मछलियां ही खायेगा।

उपजाऊ भूमि के प्रदेश में
खेती हो सकती है।
वहाँ
अन्न फल एवं शाक-भाजी उगाई जा सकती है। 

उन्हे अपनी खेती के लिए गाय और बैल बहुत उपयोगी लगे। 

उन्होने
गाय को अपनी माता माना, धरती को अपनी माता माना और नदी को माता माना ।
क्योंकि
ये सब
उनका पालन पोषण
माता के समान ही करती हैं।"

"अब जहाँ मरुभूमि है वहाँ खेती कैसे होगी?

खेती नही होगी तो वे
गाय और बैल का क्या करेंगे?

अन्न है नही
तो खाद्य के रूप में
पशु को ही खायेंगे।

तिब्बत में कोई शाकाहारी कैसे हो सकता है?
वही स्थिति अरब देशों में है। जापान में भी इतनी भूमि नही है कि कृषि पर निर्भर रह सकें।

"स्वामी जी फैज अलि की तरफ मुखातिब होते हुए बोले,
" हिन्दु कहते हैं कि
मंदिर में जाने से पहले या
पूजा करने से पहले
स्नान करो। 

मुसलमान नमाज पढने से पहले वाजु करते हैं। 
क्या अल्लहा ने कहा है कि नहाओ मत,
केवल लोटे भर पानी से
हांथ-मुँह धो लो?

"फैज अलि बोला,
क्या पता कहा ही होगा!

स्वामी जी ने आगे कहा,
नहीं,
अल्लहा ने नही कहा!

अरब देश में इतना पानी कहाँ है कि वहाँ पाँच समय नहाया जाए। 
जहाँ पीने के लिए पानी बङी मुश्किल से मिलता हो वहाँ कोई पाँच समय कैसे नहा सकता है।

यह तो
भारत में ही संभव है,
जहाँ नदियां बहती हैं,
झरने बहते हैं, कुएँ जल देते हैं।

तिब्बत में
यदि
पानी हो
तो वहाँ पाँच बार व्यक्ति यदि नहाता है तो ठंड के कारण ही मर जायेगा।
यह सब
प्रकृति ने
सबको समझाने के लिये किया है।

"स्वामी विवेका नंद जी ने आगे समझाते हुए कहा कि," मनुष्य की मृत्यु होती है।

उसके शव का अंतिम संस्कार करना होता है।

अरब देशों में वृक्ष नही होते थे, केवल रेत थी।
अतः
वहाँ मृतिका समाधी का प्रचलन हुआ,
जिसे आप दफनाना कहते हैं। 

भारत में वृक्ष बहुत बङी संख्या में थे,
लकडी.पर्याप्त उपलब्ध थी
अतः
भारत में
अग्नि संस्कार का प्रचलन हुआ। 

जिस देश में जो सुविधा थी
वहाँ उसी का प्रचलन बढा। 

वहाँ जो मजहब पनपा
उसने उसे अपने दर्शन से जोङ लिया।

"फैज अलि विस्मित होते हुए बोला! 
"स्वामी जी इसका मतलब है कि हमें
शव का अंतिम संस्कार
प्रदेश और देश के अनुसार करना चाहिये।
मजहब के अनुसार नही।

"स्वामी जी बोले , "हाँ! यही उचित है।

" किन्तु अब लोगों ने उसके साथ धर्म को जोङ दिया।

मुसलमान ये मानता है कि उसका ये शरीर कयामत के दिन उठेगा इसलिए वह शरीर को जलाकर समाप्त नही करना चाहता। 

हिन्दु मानता है कि उसकी आत्मा फिर से नया शरीर धारण करेगी
इसलिए
उसे मृत शरीर से
एक क्षंण भी मोह नही होता।

"फैज अलि ने पूछा
कि,
"एक मुसलमान के शव को जलाया जाए और एक हिन्दु के शव को दफनाया जाए
तो क्या
प्रभु नाराज नही होंगे?

"स्वामी जी ने कहा," प्रकृति के नियम ही प्रभु का आदेश हैं।
वैसे
प्रभु कभी रुष्ट नही होते
वे प्रेमसागर हैं,
करुणा सागर है।

"फैज अलि ने पूछा
तो हमें
उनसे डरना नही चाहिए?

स्वामी जी बोले, "नही!
हमें तो
ईश्वर से प्रेम करना चाहिए
वो तो पिता समान है,
दया का सागर है
फिर उससे भय कैसा। 

डरते तो उससे हैं हम
जिससे हम प्यार नही करते।

"फैज अलि ने हाँथ जोङकर स्वामी विवेकानंद जी से पूछा, "तो फिर
मजहबों के कठघरों से
मुक्त कैसे हुआ जा सकता है?

"स्वामी जी ने फैज अलि की तरफ देखते हुए
मुस्कराकर कहा,
"क्या तुम सचमुच
कठघरों से मुक्त होना चाहते हो?" 

फैज अलि ने स्वीकार करने की स्थिति में
अपना सर हिला दिया।

स्वामी जी ने आगे समझाते हुए कहा,
"फल की दुकान पर जाओ,
तुम देखोगे
वहाँ
आम, नारियल, केले, संतरे,अंगूर आदि अनेक फल बिकते हैं; किंतु वो दुकान तो फल की दुकान ही कहलाती है।

वहाँ अलग-अलग नाम से फल ही रखे होते हैं। 

" फैज अलि ने
हाँ में सर हिला दिया।

स्वामी विवेकानंद जी ने आगे कहा कि ,"अंश से अंशी की ओर चलो। 
तुम पाओगे कि सब
उसी प्रभु के रूप हैं।

"फैज अलि
अविरल आश्चर्य से
स्वामी विवेकानंद जी को
देखते रहे और बोले
"स्वामी जी
मनुष्य
ये सब क्यों नही समझता?

"स्वामी विवेकानंद जी ने शांत स्वर में कहा, मित्र! प्रभु की माया को कोई नही समझता। 
मेरा मानना तो यही है कि, "सभी धर्मों का गंतव्य स्थान एक है।
जिस प्रकार विभिन्न मार्गो से बहती हुई नदियां समुंद्र में जाकर गिरती हैं,
उसी प्रकार
सब मतमतान्तर परमात्मा की ओर ले जाते हैं। 
मानव धर्म एक है, मानव जाति एक है।"...l

16 Sept 2015

કર્મયોગ:ભગવાન શ્રી કૃષ્ણ

થોડો ટાઈમ  હોય તો આ જરૂર વાંચજો  .

ભગવાન શ્રી કૃષ્ણ  .

શ્રી કૃષ્ણ  ભગવાન ની કથા એમ કહે છે કે તેઓ જન્મ્યા પહેલાજ  તેમને મારી નાખવાની  તૈયારી થઇ ગયી હતી  . પણ તેમાંથી તેઓ આબાદ  ઉગરી  ગયા આગળ  તેમના જીવન માં ઘણા સંકટો આવ્યા પણ તેઓ લડતા રહ્યા  કોઈ ને કોઈ યુક્તિ કરીને હંમેશા બચતા રહ્યા કોઈ  પ્રસંગ માં તો તેઓ રણ છોડી  ભાગી પણ ગયા હતા  . પણ મારા જીવન માં આટલી બધી તકલીફો કેમ છે કરી તેઓ કોઈ દિવસ કોઈ ને  પોતાની કુંડળી બતાવવા નથી ગયા કે એવી કોઈ નોધ મેં નથી  વાચી , ના કોઈ ઉપવાસ કર્યા ,ના  ખુલ્લા પગે ફર્યા ,તેમને તો યજ્ઞ કર્યો તે ફક્ત અને ફક્ત કર્મો  નો  .

યુદ્ધ ના મૈદાન માં જયારે અર્જુને ધનુષ્ય બાણ નીચે નાખી દીધા , ત્યારે ભગવાન શ્રી કુષ્ણ  એ  ના તો અર્જુન ના જન્માક્ષર જોયા , ના તો તેને કોઈ દોરો તેને આપ્યો  , આ તારું યુદ્ધ છે અને તારેજ કરવાનું છે એમ અર્જુન ને સ્પષ્ટ  કહી દીધું
અર્જુને જયારે ધનુષ્ય નાખી  દીધું ત્યારે તે ધનુષ ઉપાડી ભગવાને અર્જુન વતી લડાઈ નથી કરી।  બાકી  શ્રી કુષ્ણ ભગવાન ખુબ મહાન યોદ્ધા હતા  . તેઓ  એકલા હાથે આખી કૌરવો ની સેના ને હરાવી શકે તેમ હતા  ,પણ ભગવાને શસ્ત્ર  હાથ માં નહોતું પકડ્યું પણ જો અર્જુને લડવાની તૈયારી બતાવી તો તેઓ તેના સારથી ( માર્ગદર્શક ) બનવા તૈયાર હતા  .

આ  રીતે ભગવાન શ્રી કૃષ્ણ  આપણ ને સમજાવે છે  કે જો દુનિયા ની તકલીફો માં તું  જાતે લડીશ તો  હું હંમેશા  તારી આગળ ઉભો હોઈશ

તારી તકલીફો ને હું હળવી કરી નાખીશ અને તને માર્ગદર્શન પણ  આપીશ  ,

કદાચ આજ ગીતા નો સહુથી સંક્ષિપ્ત સાર છે ,

જયારે તમે કોઈ ભગવાન ના દર્શને જાવ તો ભગવાન ને એટલું જરૂર કહેજોં  ભગવાન મારી તકલીફો થી લડવાની મને શક્તિ આપજો , નહિ કે ભગવાન મારી તકલીફો થી છુટકારો આપજો ,

ભગવાન આપની પાસે ઉપવાસ નથી માંગતા
નહિ કે તું ચાલતો આવ કે બીજું કઈ

ભગવાન માંગે છે તો તમારું કર્મ

માટે કર્મ  કરતા રહેવું , ભગવાન ��

મનમાં... ભરીને જીવવું,
એના કરતાં,
મન... ભરીને જીવવું..!
धमँ करशो तो भगवान पासे मागवु पडशे कमँ करशो तो भगवान ने आपवु पडशे
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

हशगुल्ला

आखिर पत्नी क्या है..?
😛
फौजी: सारे दुश्मन हमसे डरते हैं और हम बीवी से !
😛
मोची: मैं जूतों की मरम्मत करता हूं और बीवी मेरी !
😛
टीचर: मैं कॉलेज में लैक्चर देता हूं और घर में बीवी से सुनता हूं !
😛
ऑफिसर: मैं ऑफिस में बॉस हूं और घर में बीवी का नौकर !
😛
जज: मैं कोर्ट में फैसला सुनाता हूं और घर में इंसाफ के लिए तरसता हूं !
😛
दुकानदार :- मैं दुनिया को बनाता हूँ फिर घर में पत्नी मुझे बनाती है !
😛
डॉक्टर : मैं दुनिया को ठीक करता हूँ और घर में बीवी मुझे ठीक करती है !
😛
फेसबुकिया : मैं दुनिया को पकाता हूँ और घर में बीवी मुझे पकाती है !
😛
अकाउंटेंट : मैं दुनिया का हिसाब रखता हूँ और बीवी मेरा हिसाब बराबर करती है !
😛
{फैसला आपके हाथ में है.. कुंवारे रहो खुश रहो no wife easy life}
जो शादी कर चुके हैं वो सब्र करें ।

शादी के बाद पत्नी कैसे बदलती है , जरा गौर कीजिए :
😛
पहले साल : मैंने कहा जी खाना खा लीजिए , आपने काफी देर से कुछ खाया नहीं ।
😛
दूसरे साल : जी खाना तैयार है , लगा दूं ?
😛
तीसरे साल : खाना बन चुका है , जब खाना हो तब बता देना ।
😛
चौथे साल : खाना बनाकर रख दिया है , मैं बाजार जा रही हूं , खुद ही निकाल कर खा लेना ।
😛
पांचवे साल : मैं कहती हूं आज मुझ से खाना नहीं बनेगा , होटल से ले आओ ।
😛
छठे साल : जब देखो खाना , खाना और खाना , अभी सुबह ही तो खाया था ।
😛
शादी के बाद पति कैसे बदलते है , जरा गौर कीजिए
😛
पहले साल : dear संभलकर उधर गड्ढा हैं
😛
दूसरे साल : अरे यार देख के उधर गड्ढा हैं
😛
तीसरे साल : दिखता नहीं उधर गड्ढा हैं
😛
चोथे साल : अंधी हैं क्या गड्ढा नहीं दिखता
😛
पांचवे साल : अरे उधर -किधर मरने जा रही हैं गड्ढा तो इधर हैं ..

मुस्कुराते रहिये...😛😀😛

हंसना ही जिन्दगी है।
वरना शांत तो मुर्दे रहते हैं।
Tribute to all married man
घरवाली के ताने जब हद
से बाहर हो जाये तो
तत्काल जूता उठाए
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पहने और घर से बाहर निकल जाये

बीच में आपने जो सोचा है उसके लिए 56 इंच का सीना चाहिए

कहते है की जब इंसान के पाप का घड़ा भर जाता हैं तब उसकी मृत्यु हो जाती हैं

उसी तरह जब इंसान की खुशियों का घड़ा भर जाता हैं तब उसकी शादी हो जाती हैं !!!!

जिंदगी के 8 हिस्से होते है...

1. पढाई

2. खेल

3. मौज मस्ती

4. प्यार

5. शादी

6.

7.

8.

क्या ढूंड रहे हो...?

शादी होने के बाद खतम...!
सब कुछ खतम...!!
गेम ओव्हर... भाई.....

बीवियाँ मनमोहन सिंह बना देती है.
वरना पैदा तो सभी मोदी ही होते है
😂😂😂😂😂😂😂आ हंस लें ज़रा👻😣😂😂😂😂😂😂😂😡

कंप्यूटर ट्रिक

आज मैं आपके लिए एक
ऐसी जानकारी लेकर आया हूं जिसको जानकर
आपकी खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। ये एक
ऐसी जानकारी है जिसका नॉलेज बहुतही कम
लोगों कोहोता है। क्या आपको पता है कि जनरल उपयोग में
आने वाले Pendrive को कम्प्यूटर में RAM (flash drive) की तरह
उपयोग में लिया जा सकता है। ये
तो आपको पता ही होगा कि कम्प्यूटर की स्पीड सबसे
ज्यादाउसमें लगाई जाने वाली RAM की क्षमता पर निर्भर
करती है यदि हमारे कम्प्यूटर में RAM की साइज बहुत ही कम है
तोहमारा कम्प्यूटर धीरे चलेगा। ऐसी स्थिति में यदि हम
एक्स्ट्रा RAM खरीदेंगे तो कम से कम 1000 से1500 रूपयेतक
खर्च हो जाएंगे लकिन अगर आप अपने Pendrive को RAM
बनाना जानते हो तो आपका ये काम बहुत आसान
हो जाएगा।आओ जानते है कि कैसे बनाया जाता है पेनड्राइव
को रेम1. सबसे पहले अपने Computer के USBपोर्ट में अपनी pen
drive लगाइये ! (पेनड्राइव कम से कम 2
जीबी का होतो अच्छा रहेगा)2. अब MyComputer के आइकन
पर जाकरRight click कीजिये। और Properties विकल्प पर
क्लिक कीजिये।3. एक विण्डो ओपन होगी इसमें Advanced
System Settings पर क्लिक करें। (यदि आप विण्डोज xp यूज
करते हैं तो Advanced tab पर क्लिककरनाहोगा)4. अब
Advance Tab पर क्लिक कर Settings बटन पर क्लिक कीजिये।
5. Performance Option विण्डो खुलेगी जिसमेंAdvanced tab
पर क्लिक कीजिये। और Virtual memory केअन्दर दिये गए
Change बटन पर क्लिक कीजिये।6. तब एक
विण्डो खुलेगी जिसमें Automatically manage paging file
size for all drives पर टिक (चैकमार्क) अगरलग रहा हो तो इसे
हटा दीजिये। अब अपनी pendrive को दी गयी लिस्ट मेंसे
सलैक्ट कीजिये। (जैसे कि मैंने अपनी पैनड्राइव को चुना है) अब
custom size पर क्लिक कीजियेऔर वैल्यू दीजिए
जो कि आपकी pendrive के खाली स्पेस के अनुसार दे सकते
हो।अब सैट बटन पर क्लिक करके ओके बटन पर क्लिक करें।
आपको एक मैसेज प्राप्त होगा जिसमें ओके पर क्लिक करें।अब
एक मैसेज और प्रस्तुत होगा जिसमें RestartNow बटन पर क्लिक
करें।।।अब आपका कम्प्यूटर जब पुन: चालू
होगा तो आपका पेनड्राइव रेम की तरह काम करेगा और
सिस्टम की स्पीड में बहुत ज्यादा फर्क देखने को मिलेगा।
Note -ध्यान रहे कम्प्यूटर जब रिस्टार्ट
हो रहा हो तो पेनड्राइव कम्प्यूटर में लगा हुआ होना जरूरी है।

10 Sept 2015

5th September

📚📖रोचक जानकारी🙇🎓🏃

👉भारत में जहाँ 'शिक्षक दिवस' 5 सितंबर को मनाया जाता है, वहीं 'अन्तरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस' का आयोजन 5 अक्टूबर को होता है।

👉रोचक तथ्य यह भी है कि शिक्षक दिवस दुनिया भर में मनाया जाता है, लेकिन सबने इसके लिए एक अलग दिन निर्धारित किया है। कुछ देशों में इस दिन अवकाश रहता है तो कहीं-कहीं यह कामकाजी दिन ही रहता है।

👉यूनेस्को ने 5 अक्टूबर को 'अन्तरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस' घोषित किया था। साल 1994 से ही इसे मनाया जा रहा है। शिक्षकों के प्रति सहयोग को बढ़ावा देने और भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शिक्षकों के महत्व के प्रति जागरूकता लाने के मकसद से इसकी शुरुआत की गई थी।

👉चीन में 1931 में 'नेशनल सेंट्रल यूनिवर्सिटी' में शिक्षक दिवस की शुरूआत की गई थी। चीन सरकार ने 1932 में इसे स्वीकृति दी। बाद में 1939 में कन्फ़्यूशियस के जन्मदिवस, 27 अगस्त को शिक्षक दिवस घोषित किया गया, लेकिन 1951 में इस घोषणा को वापस ले लिया गया।

👉साल 1985 में 10 सितम्बर को शिक्षक दिवस घोषित किया गया। अब चीन के ज्यादातर लोग फिर से चाहते हैं कि कन्फ्यूशियस का जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस हो।

👉रूस में 1965 से 1994 तक अक्टूबर महीने के पहले रविवार के दिन शिक्षक दिवस मनाया जाता रहा। साल 1994 से विश्व शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को ही मनाया जाने लगा।

👉अमेरिका में मई के पहले पूर्ण सप्ताह के मंगलवार को शिक्षक दिवस घोषित किया गया है और वहाँ सप्ताह भर इसके आयोजन होते हैं।

👉थाइलैंड में हर साल 16 जनवरी को 'राष्ट्रीय शिक्षक दिवस' मनाया जाता है। यहाँ 21 नवंबर, 1956 को एक प्रस्ताव लाकर शिक्षक दिवस को स्वीकृति दी गई थी। पहला शिक्षक दिवस 1957 में मनाया गया था। इस दिन यहाँ स्कूलों में अवकाश रहता है।

👉ईरान में वहाँ के प्रोफेसर अयातुल्लाह मोर्तेजा मोतेहारी की हत्या के बाद उनकी याद में 2 मई को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। मोतेहारी की 2 मई, 1980 को हत्या कर दी गई थी।

👉तुर्की में 24 नवंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। वहाँ के पहले राष्ट्रपति कमाल अतातुर्क ने यह घोषणा की थी।

👉मलेशिया में शिक्षक दिवस 16 मई को मनाया जाता है, वहाँ इस ख़ास दिन को 'हरि गुरु' कहते हैं।
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁

Gk short tricks in GUJARATI

💎GK Short tricks💎

🎀1] BHAJSA.........

     🔸B-Babur
     🔸H-Humayun
     🔸A-Akbar
     🔸J-Jahangir
     🔸S-Shahjahan
     🔸A-Aurangzeb

🍀It goes like this Babur ka beta Humayun, Humayun ka Akbar, Akbar ka Jahangir,Jahangir ka Shahjahan aur Shahjahan ka beta Aurangzeb

🎀2] States touches to China : "JAMMU KA SIpahi ARUN HIMAlaya par UTARA.........."

🔹1. JAMMU - JAMMU
🔹2. KA - KASHMIR
🔹3. SI - SIKKIM
🔹4. ARUN - ARUNACHAL PRADESH
🔹5. HIMA - HIMACHAL PRADESH
🔹6. UTARA - UTTARAKHAND

🎀3] States touches to Bhutan : “SAAB "

     🔹1. SIKKIM
     🔹2. ARUNACHAL PRADESH
     🔹3. ASSAM
     🔹4. BENGAL

🎀4] 4 Buddhist councils serial is RAVA PAKA .........

    🔸1- RAjigriha
    🔸2- VAsali
    🔸3- PAtiputra
    🔸4- KAshmir

🎀5] Indian states touch boundary of Myanmar : "ARUNA MAMI"

🔹1. ARU - ARUnachal
🔹2. NA - NAgaland
🔹3. MA - MAnipur
🔹4. MI - MIzoram

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6 Sept 2015

मोदी जी शिक्षक दिन का संवाद

[9/4, 12 🌅Teacher Day special
👳✌छात्रों fके मजेदार सवालों और प्रधान हां बच्चों को संबोधित किया, वहीं दिल्ली और दूसरे राज्यों के छात्रों के सवालों के जवाब भी दिए। उनसे पूछे गए सभी सवाल और उसके जवाब....

1.सबसे कम उम्र में ऐवरेस्ट पर चढ़ने वाली मलावात पूर्णा (निजामाबाद, तेलंगाना) का सवाल: आपके जीवन पर किसका प्रभाव सबसे ज्यादा रहा है?

नरेंद्र मोदी: जीवन किसी एक व्यक्ति के कारण नहीं बनता है। अगर हम अच्छी चीजों को ग्रहण करने वाले होते हैं, तो हर जगह सीखते हैं। कई बार सफर के दौरान रेल के डिब्बे में भी कुछ न कुछ सीखते हैं। मेरे जीवन में भी शिक्षकों, मां और कई लोगों को प्रभाव रहा। बाद में स्वामी विवेकानंद को पढ़ने का मौका मिला। मुझे लगता है कि उनका प्रभाव काफी अधिक रहा।

2.इंग्लिश ओलिंपियाड में टॉप करने वाली शैली किपजेन ( मणिपुर) का सवाल: सफल नेता बनने के लिए क्या गुण हो? राजनीति में आने के लिए क्या करूं?

नरेंद्र मोदी: दुर्भाग्य से राजनीति आज बदनाम हो गई है। राजनीति में भी प्रतिभाशाली लोगों की जरूरत है। इसके लिए लीडरशिप का गुण होना चाहिए। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि हम नेता क्यों बनना चाहते हैं। सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए या समाज में बदलाव लाने के लिए।

3.जूनियर मास्टरशेफ का खिताब जीतने वाले सार्थक भारद्वाज (देहरादून, उत्तराखंड) का सवाल: डिजिटल इंडिया बहुत अच्छा कार्यक्रम है, लेकिन भारत में कई जगहों पर बिजली तक नहीं है, यह कैसे सफल होगा?

नरेंद्र मोदी: हमारे देश में 18 हजार गावों में बिजली नहीं है। मैं इस दिशा में काम कर रहा हूं और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन गांवों में एक हजार दिनों में बिजली चाहिए। दूसरी बात, डिजिटल क्रियाकलापों के लिए बिजली जरूरी नहीं है। सोलर एनर्जी विकल्प है और मोबाइल से भी यह भी संभव है। इसलिए बिजली कभी रुकावट नहीं बनेगी। मेरी कोशिश है कि 2022 तक सभी घरों को 24 घंटे बिजली मिले।

4.स्पेशल ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली सोनिया येलप्पा पाटिल (पणजी, गोवा) का सवाल: आपको कौन-सा खेल पसंद है?

नरेंद्र मोदी: लड़कियां खेल में आगे बढ़ती हैं, तो इसमें मां का खास योगदान होता है। मैं उनके टीचर को विशेष रूप से बधाई देता हूं, जिन्होंने सोनिया को आगे बढ़ाना के लिए कितना कुछ किया होगा। राजनीति वाले क्या खेलते हैं सबको पता है। बचपन में कबड्डी, खो-खो खेलता था और गांव में होने की वजह से तलाब में कपड़े धोने जाता था तो तैरना आ गया और बाद में तैराकी में आनंद आने लगा।

5.वेस्ट मैनेजमेंट पर ऐप बनाने वाली बेंगलुरु की 5 लड़कियों का पेंटागन ग्रुप का सवाल: स्वच्छ भारत की क्या चुनौतियां हैं?

नरेंद्र मोदी: स्वच्छ भारत अभियान हमारे स्वभाव से जुड़ा है। यह एक ऐसा कार्यक्रम है, जिस पर किसी ने सवाल नहीं उठाया है। इस अभियान का सबने समर्थन किया है। वेस्ट मैनेजमेंट आज बहुत बड़ा उद्योग बन रहा है और हम इसे लेकर कई योजनाएं चला रहे हैं।

6.विज्ञान कांग्रेस में असाधारण माने गए अनमोल काबरा (पटना, बिहार) का सवाल: तीन घंटे की प्रतियोगी परीक्षा में टॉप करना आज की शिक्षा व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बन गया है। आप इस पर क्या कहना चाहते हैं?

नरेंद्र मोदी: यह बात सही है कि हमारे यहां मां-बाप का एक स्वभाव होता है कि जो वे खुद न कर पाए चाहते हैं कि उनके बच्चे वह हासिल करें। मैं इस संबंध में एक छोटा-सा बदलाव लाने की कोशिश कर रहा हूं। मैंने शिक्षा विभाग से कहा है कि स्कूलों को चरित्र प्रमाण पत्र के बजाय अभिरुचि प्रमाण पत्र देना चाहिए, जिसे हर तीन महीने अपडेट किया जाना चाहिए। इसे छात्र के दोस्तों और शिक्षकों आदि द्वारा लगातार दिए गए फीडबैक के आधार पर तैयार किया जाना चाहिए।

7.क्लाउड कम्प्यूटिंग में सराहनीय काम करने वाली के. विलासिनी ( तमिलनाडु) का सवाल: मैं देश सेवा के लिए क्या करूं?

नरेंद्र मोदी: तुम जो अभी कर रही हो, वह भी देश की सेवा है। लोग मानते हैं कि देश की सेवा सिर्फ फौज और राजनीति जैसे क्षेत्रों में जाकर की जा सकती है। आप खाना बर्बाद नहीं करते हैं, तो यह भी देश सेवा है। करोड़ों लोगों द्वारा किए जा रहे छोटे-छोटे काम भी देश सेवा है।
8. ई-वेस्ट प्रॉजेक्ट पर काम कर रहे आत्मिक अजॉय (बेंगलुरु, कर्नाटक) का सवाल: आज युवा शिक्षक बनने में रुचि क्यों नहीं ले रहे हैं? इसके लिए हमें क्या करना चाहिए?

नरेंद्र मोदी: ऐसा नहीं है कि देश में अच्छे शिक्षक नहीं हैं। मैं चाहता हूं कि जीवन में जिन्होंने विशिष्ट उपलब्धि हासिल की है, वे सप्ताह में एक घंटा या साल में 100 घंटे क्लास में बच्चों के साथ बिताएं। मैं चाहूंगा कि जो लोग मेरे विचार सुन रहे हैं, वे इस दिशा में पहले करें।

9. शराब मुक्ति के क्षेत्र में काम करने वाली अंशिका मिन्ज (बोकारो, झारखंड) का सवाल: किसी विद्यार्थी के सफलता का क्या मंत्र हो सकते हैं?

नरेंद्र मोदी: सफलता का कोई मंत्र नहीं हो सकता है। बस ठान लेना चाहिए कि विफल नहीं होंगे। दिक्कत यह होती है कि लोग एक-आध बार विफल हो जाते हैं तो उसे अपने सपनों की कब्रिस्तान बना लेते हैं। हर विफलता को सफलता के लिए सीख के तौर पर लेना चाहिए।

10.वनस्पति पर खोज करने वाली राबिया नज़ीर (श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर) का सवाल: छात्र के रूप में आपको कौन-सी बात उत्साहित करती थी, क्लास या क्लास से बाहर?

नरेंद्र मोदी: मैं पढ़ने में बहुत अच्छा नहीं था, लेकिन चीजों को मैं बारीकी से देखता था। क्लास रूम में हमें प्राथमिकता तय करने में मदद मिलती है और उससे कई बार आगे बढ़ने में सहायता होती है।

11.दिल्ली की छात्रा रिकी का सवाल: आपने अपनी कविताओं का संग्रह लिखा है। इस क्षेत्र में आपकी रुचि कैसे विकसित हुई?

नरेंद्र मोदी: हर किसी के अंदर कविता का वास होता है। मेरी रचना कविता के पैमाने पर फिट हो, ऐसा मैं नहीं मानता। जो भावनाएं आती थीं, उन्हें कागज पर व्यक्त कर देता था।

12.दिल्ली की छात्रा श्रेया सिंह का सवाल: देखा है कि आप बिना लिखा हुआ भाषण देते हैं। यह कला आपने कैसे विकसित की?

नरेंद्र मोदी: पहला, अच्छा भाषण देने के लिए अच्छा श्रोता होना जरूरी है। दूसरी बात, यह चिंता मत कीजिए कि आपकी बात पर और लोग क्या कहेंगे। तीसरा, नोट बनाने की आदत होनी चाहिए। जो बातें महत्वपूर्ण हैं, उसे रोचक ढंग से कहें ताकि सुनने वाले लोगों को ध्यान न भटके।

13.दिल्ली की छात्रा अनामिका दुबे का सवाल: आजकल विद्यार्थियों पर इंजिनियर या डॉक्टर बनने का बहुत दबाव रहता है। अभिभावकों को कैसे समझाया जाए? अगर आप पर भी ऐसा दबाव होता तो देश को इतना अच्छा प्रधानमंत्री नहीं मिल पाता?

नरेंद्र मोदी: मैं ऐसी स्थिति में नहीं था। मैं तो क्लर्क बन जाता तो भी मेरे परिवार में उत्सव का माहौल होता। ऐसे में डॉक्टर-इंजिनियर का सपना देखना तो संभव नहीं था, लेकिन मैं इससे सहमत हूं कि माता-पिता को अपने बच्चों पर अपनी इच्छा नहीं थोपनी चाहिए और मैं आपके माता-पिता को भी यहां से संदेश देना चाहता हूं कि वे आपके साथ ऐसा न करें।

14. जवाहर नवोदय विद्यालय की पूजा शर्मा का सवाला: विश्व योग दिवस का विचार आपके मन में कैसे आया?

नरेंद्र मोदी: जब मैं मुख्यमंत्री भी नहीं था, तो एक बार ऑस्ट्रेलिया गया था और वहां हर कोई मेरे से योग के बारे में सवाल कर रहा था। मैंने बाद में कई बार इसका प्रस्ताव रखा, लेकिन कोई सुनता नहीं था। बाद में जब मुझे मौका मिला तो मैंने संयुक्त राष्ट्र संघ में इसका प्रस्ताव रखा। 21 जून के दिन का प्रस्ता l♍🙏The End 🙏♍