13 Mar 2015

कहानी अच्छाई की

🙇एक बार एक लड़का अपने स्कूल की फीस भरने के लिए एक दरवाजे से दूसरे दरवाजे तक कुछ सामान बेचा करता था,

😢 एक दिन उसका कोई
सामान नहीं बिका और उसे बड़े जोर से भूख भी लग रही थी. उसने तय किया कि अब वह जिस भी दरवाजे पर जायेगा, उससे खाना मांग
लेगा...

🚪पहला दरवाजा खटखटाते ही एक लड़की ने दरवाजा खोला, जिसे देखकर वह घबरा गया और बजाय खाने के उसने पानी का एक
गिलास माँगा.... 

🙇 लड़की ने भांप लिया था कि वह भूखा है, इसलिए वह एक...... बड़ा गिलास दूध का ले आई. लड़के ने धीरे-धीरे दूध पी लिया...

😔" कितने पैसे दूं?"
लड़के ने पूछा.
" पैसे किस बात के?"
लड़की ने जवाव में कहा.
"माँ ने मुझे सिखाया है कि जब भी किसी पर दया करो तो उसके पैसे नहीं लेने चाहिए."

😯"तो फिर मैं आपको दिल से धन्यवाद देता हूँ." जैसे ही उस लड़के ने वह घर छोड़ा, उसे न केवल शारीरिक तौर पर शक्ति मिल चुकी थी , बल्कि उसका भगवान् और आदमी पर भरोसा और भी बढ़ गया था....

⚡सालों बाद वह लड़की गंभीर रूप से बीमार पड़
गयी. लोकल डॉक्टर ने उसे शहर के बड़े अस्पताल में इलाज के लिए भेज दिया...

👷 विशेषज्ञ डॉक्टर होवार्ड  केल्ली को मरीज देखने के लिए बुलाया गया. जैसे ही उसने लड़की के कस्बे का नाम सुना, उसकी आँखों में
चमक आ गयी...

😄वह एकदम सीट से उठा और उस लड़की के कमरे में गया. उसने उस लड़की को देखा, एकदम पहचान लिया और तय कर लिया कि वह उसकी जान बचाने के लिए
जमीन-आसमान एक कर देगा....

😎उसकी मेहनत और लग्न रंग लायी और उस लड़की कि जान बच गयी.
डॉक्टर ने अस्पताल के ऑफिस में जा कर उस
लड़की के इलाज का बिल लिया....

😍 उस बिल के कौने में एक नोट लिखा और उसे उस लड़की के पास भिजवा दिया. लड़की बिल का लिफाफा देखकर घबरागयी...

😢 उसे मालूम था कि वह बीमारी से तो वह बच गयी है लेकिन बिल कि रकम जरूर उसकी जान ले लेगी...

😣 फिर भी उसने धीरे से बिल खोला, रकम को देखा और फिर अचानक उसकी नज़र बिल के कौने में पैन से लिखे नोट पर गयी...

😓जहाँ लिखा था, "एक गिलास दूध द्वारा इस बिल
का भुगतान किया जा चुका है." नीचे  उस नेक डॉक्टर
होवार्ड केल्ली के हस्ताक्षर थे.

😃 ख़ुशी और अचम्भे से उस लड़की के गालों पर आंसू टपक पड़े उसने ऊपर कि और दोनों हाथ उठा कर
कहा, " हे भगवान..! आपका बहुत-बहुत धन्यवाद..
आपका प्यार इंसानों के दिलों और हाथों के द्वारा न जाने कहाँ- कहाँ फैल चुका है."

☀अगर आप दूसरों पर.. अच्छाई करोगे तो.. आपके साथ भी.. अच्छा ही होगा .

कड़वा सच

. एक बार, गांव वालों ने सूखे के हालात देखकर तय किया कि वे
भगवान से बरसात के लिए प्रार्थना करेंगे, प्रार्थना वाले दिन
सभी लोग प्रार्थना के लिए इकट्ठे हुए, लेकिन एक
लड़का छाता लेकर आया.!!!
इसे कहते हैं : विश्वास

2. जब आप एक बच्चे को ऊपर की तरफ उछालते हो, तो वह
हंसता है। क्योंकि, वह जानता है कि आप उसे पकड़ लोगे:
इसे कहते हैं : यकीन

3. हर रात हम बिस्तर पर सोने जाते हैं, यह जाने बगैर कि हम
अगली सुबह जीवित रहेंगे भी कि नहीं और हर रात नई सुबह के
लिए अलार्म भी सैट करते हैं।
इसे कहते हैं उम्मीद:

4. हम आने वाले कल की बड़ी-बड़ी प्लानिंग करते हैं, बावजूद
इसके कि हमें भविष्य का जरा भी ज्ञान नहीं हैं।
इसे कहते हैं: कान्फिडेंस

5. अपने दोस्तों-यारों और परिचितों को उनकी शादी के बाद हम
बीवी के नाम पर रोते-बिलखते और परेशान होते हुए देखते हैं।
हम फिर भी शादी करते हैं....???????
इसे कहते हैं: ओवर कान्फिडेंस :
1) अगर लगातार दौडने से लक्ष्मी मिलती तो,
    आज कुत्ता लक्ष्मीपति होता.....

2) मौत रिश्वत नही लेती लेकिन,
    रिश्वत मौत ले लेती है.....

3)काम मेँ ईश्वर का साथ मांगो लेकिन,
   ईश्वर काम कर दे ऐसा मत मांगो......

4) कडवा सत्य एक गरीब पेट के लिए सुबह
    जल्दी उठकर दोडता है और एक अमीर पेट
    कम करने के लिए सुबह जल्दी उठकर
    दौडता है..

5) 50 रुपे मेँ 1 लीटर कोल्डंड्रीक आती है..
    जिसमे स्वाद और पोषण जीरो.. और
    कमाता कौन? मल्टीनेशनल कम्पनिया और
    उसके सामने 50 रुपे मे 1 किलो फल आते
    है स्वाद भरपुर और पोषण लाजवाब और
    कमाता कौन? धुप मेँ,सर्दी मेँ,बरसात मेँ
    लारी लेकर घुमता अपना एक गरीब
    भारतवासी..

6) सबंध भले थोडा रखो लेकिन,एसा रखो
    कि शरम किसी की झेलनी ना पडे मौत
    के मुह से जिदंगी बरस पडे और मरने
    के बाद शमशान की राख भी रो पडे..

7) जब तालाब भरता है तब,मछलीया
    चीटीँयो को खाती है और जब तालाब
    खाली होता है तब चीटींया मछलियो
    को खाती है, मौका सबको मिलता है
    बस अपनी बारी का इन्तजार करो..

8)दुनिया मेँ दो तरह के लोग होते है.. एक
   जो दुसरो का नाम याद रखते है और
   दुसरा जिसका नाम दुसरे याद रखते है..

9) सुख मेँ सुखी हो तो दु:ख भोगना सिखो
    जिसको खबर नही दु:ख की तो सुख
    का क्या मजा.?

10) जीवन मेँ कुछ बडा मिल जाए तो छोटे
      को मत भुलना.. क्योकिँ जहा सुई काम
      हो वहा तलवार काम नही आती..

11) माँ-बाप का दिल दुखाकर आजतक
      दुनिया मेँ कोई सुखी नही हुआ..

12) भगवान का उपकार है कि आँसुऔ को रंग
      नही दिया वरना रात को भींगा तकिया सवेरे
      कुछ ना कुछ भैद खोल देता..

13) जो इंसान प्रेम मेँ निष्फल होता है
      वो जिदगी मे सफल होता है..

14) आज करे कल कर कल करे
      सो परसो ईतनी भी क्या जल्दी है जब
     जीना है बरसो..

15) दुनिया का सबसे कीमती प्रवाही
      कौनसा है? आँसु जिसमेँ 1%पानी
      और 99% भावनाए होती है..

16) दुनिया का सबसे अमीर आदमी भी
      माँ के. बिना गरीब है..

17) गुस्से मे आदमी कभी कभी व्यर्थ बाते
      करता है, तो कभी मन की बात भी
      बोल देता है..

18) भगवान खडा है तुझे सब कुछ देने के
      लिए लेकिन तु चम्मच लेकर खडा है
      पुरा सागर माँगने के लिए..

19) आप यह पोस्ट पढ रहे
      हो ईसका असतित्व
      आप के माँ बाप है...

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भारत के प्रमुख पदाधिकारी

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💕 * राष्ट्रपति
श्री प्रणब मुखर्जी
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श्री हामिद अंसारी
💕 * प्रधान मंत्री
श्री नरेंदर मोदी
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श्रीमती सुमित्रा महाजन
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श्री एच एस ब्रह्म
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🚥 श्री रनजीत कुमार
💕 * राष्ट्रीय विधि आयोग के अध्यक्ष
🚥 श्री ए पी शाह
💕 * राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
🚥 श्री अजीत कुमार डोवल
: इसको याद करलो, एग्जाम में अक्सर पूछ लिया जाता है !!!
-------------------------------------
[राज्य] [मुख्यमंत्री] {Updated }}
[1] महाराष्ट्र-- देवेंद्र फड़नवीस
[2] हरियाणा--मनोहरलाल खट्टर
[3] झारखण्ड —-श्री रघुवर दास
[4] जम्मू और कश्मीर —–mukti  mohamad sahid
[5] हिमाचल प्रदेश —–वीरभद्र सिंह
[6] कर्नाटक —–के. सिद्धारमैया
[7] केरल —— ओमान चांडी
[8] मध्य प्रदेश -- शिवराज सिंह चौहान
[9] तेलंगाना -- चंद्रशेखर राव
[10] सीमांध्र - - चन्द्रबाबू नायडू
[11] अरुणाचल प्रदेश —- नाबम टुकी
[12] असम —- तरुण कुमार गगोई
[13] बिहार —– जीतम राम मांझी
[14] छत्तीसढ —-डॉ.रमन सिंह
[15] दिल्ली —arvindkejrival
[16] गोआ —– Lakshmikant parsekar.
[17] पॉण्डिचेरी - - एन.रंगास्वामी
[18] पंजाब- - प्रकाश सिंह बादल
[19] राजस्थान -वसुंधरा राजेसिंधिया
[20] सिक्किम - पवन कुमारचामलिंग
[21] तमिलनाडु– O. Panneerselvam
[22] त्रिपुरा- - - माणिक सरकार
[23] उत्तराखण्ड —— हरीश रावत
[24] उत्तर प्रदेश- अखिलेश यादव
[25] पश्चिम बंगाल ——ममता बनर्जी,
[26] गुजरात —– आनंदी बेन पटेल
[27] मणिपुर —– ओकराम इबोईसिंह
[28] मेघालय —– मुकुल संगमा
[29] मिज़ोरम -- ललथानवाला
[30] नागालैण्ड —– टी आरजेलियांग
[31] ओडिशा —– नवीन पटनायक

11 Mar 2015

हम पानी क्यों ना पीये खाना खाने के बाद।

ये जानना बहुत जरुरी है ...
हम पानी क्यों ना पीये खाना खाने के बाद।
क्या कारण है |

हमने दाल खाई,
हमने सब्जी खाई,
हमने रोटी खाई,
हमने दही खाया
लस्सी पी ,
दूध,दही छाझ लस्सी फल आदि|,
ये सब कुछ भोजन के रूप मे हमने ग्रहण किया
ये सब कुछ हमको उर्जा देता है
और पेट उस उर्जा को आगे ट्रांसफर करता है |
पेट मे एक छोटा सा स्थान होता है जिसको हम हिंदी मे कहते है "अमाशय"
उसी स्थान का संस्कृत नाम है "जठर"|
उसी स्थान को अंग्रेजी मे कहते है
" epigastrium "|

ये एक थेली की तरह होता है
और यह जठर हमारे शरीर मे सबसे
महत्वपूर्ण है
क्योंकि सारा खाना सबसे पहले इसी मे आता है।

ये बहुत छोटा सा स्थान हैं
इसमें अधिक से अधिक 350GMS खाना आ सकता है |
हम कुछ भी खाते सब ये अमाशय मे आ जाता है|

आमाशय मे अग्नि प्रदीप्त होती है उसी को कहते हे"जठराग्न"।
|ये जठराग्नि है वो अमाशय मे प्रदीप्त होने वाली आग है ।

ऐसे ही पेट मे होता है जेसे ही आपने खाना खाया की जठराग्नि प्रदीप्त हो गयी |
यह ऑटोमेटिक है,जेसे ही अपने रोटी का पहला टुकड़ा मुँह मे डाला की इधर जठराग्नि प्रदीप्त हो गई|
▶ ये अग्नि तब तक जलती हे जब तक खाना पचता है | ◀

🔹अब अपने खाते ही गटागट पानी पी लिया और खूब ठंडा पानी पी लिया|

और कई लोग तो बोतल पे बोतल पी जाते है |

अब जो आग (जठराग्नि) जल रही थी वो बुझ गयी|

🔹आग अगर बुझ गयी तो खाने की पचने की जो क्रिया है वो रुक गयी|

🔸अब हमेशा याद रखें खाना जाने पर हमारे पेट में दो ही क्रिया होती है,

एक क्रिया है जिसको हम कहते हे "Digestion"  और दूसरी है "fermentation"
फर्मेंटेशन का मतलब है सडना
और डायजेशन का मतलब हे पचना|

🔸आयुर्वेद के हिसाब से आग जलेगी तो खाना पचेगा,खाना पचेगा तो उससे रस बनेगा|

जो रस बनेगा तो उसी रस से मांस,मज्जा,रक्त,वीर्य,हड्डिया,मल,मूत्र और अस्थि बनेगा और सबसे अंत मे मेद बनेगा|

🔸ये तभी होगा जब खाना पचेगा|🔸

यह सब हमें चाहिए|

ये तो हुई खाना पचने की बात
🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔸
अब जब खाना सड़ेगा तब क्या होगा..?

खाने के सड़ने पर सबसे पहला जहर जो बनता है वो हे यूरिक एसिड (uric acid )

|कई बार आप डॉक्टर के पास जाकर कहते है की मुझे घुटने मे दर्द हो रहा है,
मुझे कंधे-कमर मे दर्द हो रहा है

तो डॉक्टर कहेगा आपका यूरिक एसिड बढ़ रहा है आप ये दवा खाओ, वो दवा खाओ
यूरिक एसिड कम करो|

और एक दूसरा उदाहरण खाना

जब खाना सड़ता है, तो यूरिक एसिड जेसा ही एक दूसरा विष बनता है जिसको हम कहते हे
LDL (Low Density lipoprotive)
माने खराब कोलेस्ट्रोल (cholesterol )|

जब आप ब्लड प्रेशर(BP) चेक कराने डॉक्टर के पास जाते हैं तो वो आपको कहता है (HIGH BP )

हाई-बीपी है आप पूछोगे कारण बताओ?

तो वो कहेगा कोलेस्ट्रोल बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है |

आप ज्यादा पूछोगे की कोलेस्ट्रोल कौनसा बहुत है ?

तो वो आपको कहेगा LDL बहुत है |

इससे भी ज्यादा खतरनाक एक  विष हे
वो है VLDL
(Very Low Density lipoprotive)|

ये भी कोलेस्ट्रॉल जेसा ही विष है।
अगर VLDL बहुत बढ़ गया तो आपको भगवान भी नहीं बचा सकता|

खाना सड़ने पर और जो जहर बनते है उसमे एक ओर विष है जिसको अंग्रेजी मे हम कहते है triglycerides|

जब भी डॉक्टर आपको कहे की आपका "triglycerides" बढ़ा हुआ हे तो समज लीजिए की आपके शरीर मे विष निर्माण हो रहा है |

तो कोई यूरिक एसिड के नाम से कहे,कोई कोलेस्ट्रोल के नाम से कहे, कोई LDL -VLDL के नाम से कहे समझ लीजिए की ये
विष हे और ऐसे विष 103 है |

ये सभी विष तब बनते है जब खाना सड़ता है |

मतलब समझ लीजिए किसी का कोलेस्ट्रोल बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे ध्यान आना चाहिए की खाना पच नहीं रहा है ,

कोई कहता हे मेरा triglycerides बहुत बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे डायग्नोसिस कर लीजिए आप ! की आपका खाना पच नहीं रहा है |

कोई कहता है मेरा यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट लगना चाहिए समझने मे की खाना पच नहीं रहा है |

क्योंकि खाना पचने पर इनमे से कोई भी जहर नहीं बनता|

खाना पचने पर जो बनता है वो है मांस,मज्जा,रक्त ,वीर्य,हड्डिया,मल,मूत्र,अस्थि

और

खाना नहीं पचने पर बनता है यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रोल
,LDL-VLDL|

और यही आपके शरीर को रोगों का घर बनाते है !

पेट मे बनने वाला यही जहर जब
ज्यादा बढ़कर खून मे आते है ! तो खून दिल की नाड़ियो मे से निकल नहीं पाता और रोज थोड़ा थोड़ा कचरा जो खून मे आया है इकट्ठा होता रहता है और एक दिन नाड़ी को ब्लॉक कर देता है
*जिसे आप heart attack कहते हैं !

तो हमें जिंदगी मे ध्यान इस बात पर देना है
की जो हम खा रहे हे वो शरीर मे ठीक से पचना चाहिए
और खाना ठीक से पचना चाहिए इसके लिए पेट मे ठीक से आग (जठराग्नि) प्रदीप्त होनी ही चाहिए|

क्योंकि बिना आग के खाना पचता नहीं हे और खाना पकता भी नहीं है

🔹* महत्व की बात खाने को खाना नहीं खाने को पचाना है |

आपने क्या खाया कितना खाया वो महत्व नहीं हे।

खाना अच्छे से पचे इसके लिए वाग्भट्ट जी ने सूत्र दिया !!

"भोजनान्ते विषं वारी"
---------------
🔸🔸 (मतलब खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर
है )🔸🔸

* इसलिए खाने के तुरंत बाद पानी कभी मत पिये!*

अब आपके मन मे सवाल आएगा कितनी देर तक नहीं पीना ???

तो 1 घंटे 48 मिनट तक नहीं पीना !

अब आप कहेंगे इसका क्या calculation हैं ??

बात ऐसी है !

जब हम खाना खाते हैं तो जठराग्नि द्वारा सब एक दूसरे मे मिक्स होता है और फिर खाना पेस्ट मे बदलता हैं है !

पेस्ट मे बदलने की क्रिया होने तक 1 घंटा 48 मिनट
का समय लगता है !

उसके बाद जठराग्नि कम हो जाती है !

(बुझती तो नहीं लेकिन बहुत
धीमी हो जाती है )

पेस्ट बनने के बाद शरीर मे रस बनने की परिक्रिया शुरू होती है !

तब हमारे शरीर को पानी की जरूरत होती हैं ।

तब आप जितना इच्छा हो उतना पानी पिये !!

जो बहुत मेहनती लोग है (खेत मे हल चलाने वाले ,रिक्शा खीचने वाले पत्थर तोड़ने वाले)

उनको 1 घंटे के बाद ही रस बनने
लगता है उनको  घंटे बाद
पानी पीना चाहिए !

अब आप कहेंगे खाना खाने के पहले कितने मिनट तक पानी पी सकते हैं ???

तो खाना खाने के 45 मिनट पहले तक आप पानी पी सकते हैं !

अब आप पूछेंगे ये मिनट का calculation ????

बात ऐसी ही जब हम पानी पीते हैं
तो वो शरीर के प्रत्येक अंग तक जाता है !

और अगर बच जाये तो 45 मिनट बाद मूत्र पिंड तक पहुंचता है !

तो पानी - पीने से मूत्र पिंड तक आने का समय 45 मिनट का है !

तो आप खाना खाने से 45 मिनट पहले ही पाने पिये !

इसका जरूर पालण करे !

अधिक अधिक लोगो को बताएं

बहुत बहुत धन्यवाद !

10 Mar 2015

घर में सुख-शांति के लिए


 

वास्तुशास्त्र के नियमों के उचित पालन से शरीर की जैव-रासायनिक क्रिया को संतुलित रखने में सहायता मिलती है।

घर या वास्तु के मुख्य दरवाजे में देहरी (दहलीज) लगाने से अनेक अनिष्टकारी शक्तियाँ प्रवेश नहीं कर पातीं व दूर रहती हैं। प्रतिदिन सुबह मुख्य द्वार के सामने हल्दी, कुमकुम व गोमूत्र मिश्रित गोबर से स्वस्तिक, कलश आदि आकारों में रंगोली बनाकर देहरी (दहलीज) एवं रंगोली की पूजा कर परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए कि 'हे ईश्वर ! आप मेरे घर व स्वास्थ्य की अनिष्ट शक्तियों से रक्षा करें।'

प्रवेश-द्वार के ऊपर नीम,आम, अशोक आदि के पत्ते का तोरण (बंदनवार) बाँधना मंगलकारी है।

वास्तु कि मुख्य द्वार के सामने भोजन-कक्ष, रसोईघर या खाने की मेज नहीं होनी चाहिए।

मुख्य द्वार के अलावा पूजाघर, भोजन-कक्ष एवं तिजोरी के कमरे के दरवाजे पर भी देहरी (दहलीज) अवश्य लगवानी चाहिए।

भूमि-पूजन, वास्तु-शांति, गृह-प्रवेश आदि सामान्यतः शनिवार एवं मंगलवार को नहीं करने चाहिए।

            गृहस्थियों को शयन-कक्ष में सफेद संगमरमर नहीं लगावाना चाहिए| इसे मन्दिर मे लगाना उचित है क्योंकि यह पवित्रता का द्योतक है।

कार्यालय के कामकाज, अध्ययन आदि के लिए बैठने का स्थान छत की बीम के नीचे नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे मानसिक दबाव रहता है।

बीम के नीचे वाले स्थान में भोजन बनाना व करना नहीं चाहिए। इससे आर्थिक हानि हो सकती है। बीम के नीचे सोने से स्वास्थ्य में गड़बड़ होती है तथा नींद ठीक से नहीं आती।

जिस घर, इमारत आदि के मध्य भाग (ब्रह्मस्थान) में कुआँ या गड्ढा रहता है, वहाँ रहने वालों की प्रगति में रूकावट आती है एवं अनेक प्रकार के दुःखों एवं कष्टों का सामना करना पड़ता है।

घर का ब्रह्मस्थान परिवार का एक उपयोगी मिलन स्थल है, जो परिवार को एक डोर में बाँधे रखता है।

यदि ब्रह्मस्थान की चारों सीमारेखाओं की अपेक्षा उसका केन्द्रीय भाग नीचा हो या केन्द्रीय भाग पर कोई वजनदार वस्तु रखी हो तो इसको बहुत अशुभ व अनिष्टकारी माना जाता है। इससे आपकी आंतरिक शक्ति में कमी आ सकती है व इसे संततिनाशक भी बताया गया है।

ब्रह्मस्थान में क्या निर्माण करने से क्या लाभ व क्या हानियाँ होती हैं, इसका विवरण इस प्रकार हैः

बैठक कक्ष- परिवार के सदस्यों में सामंजस्य

भोजन कक्ष- गृहस्वामी को समस्याएँ, गृहनाश

सीढ़ियाँ –मानसिक तनाव व धन नाश

लिफ्ट –गृहनाश

शौचालय –धनहानि एवं स्वास्थ्य हानि

परिभ्रमण स्थान – उत्तम

गृहस्वामी द्वारा ब्रह्मस्थान पर रहने, सोने या फैक्ट्री, दफ्तर, दुकान आदि में बैठने से बाकी सभी लोग उसके कहे अनुसार कार्य करते हैं और आज्ञापालन में विरोध नहीं करते। अपने अधीन कर्मचारी को इस स्थान पर नहीं बैठाना चाहिए, अन्यथा उसका प्रभाव आपसे अधिक हो जायेगा। इस स्थान को कभी भी किराये पर नहीं देना चाहिए।

नैर्ऋत्य दिशा में यदि शौचालय अथवा रसोईघर का निर्माण हुआ हो तो गृहस्वामी को सदैव स्वास्थ्य-संबंधी मुश्किलें रहती हैं। अतः इन्हें सर्वप्रथम हटा लेना चाहिए। चीनी 'वायु-जल' वास्तुपद्धति 'फेंगशुई' के मत से यहाँ गहरे पीले रंग का 0 वाट का बल्ब सदैव जलता रखने से इस दोष का काफी हद तक निवारण सम्भव है।

ईशान रखें नीचा, नैर्ऋत्य रखें ऊँचा।

यदि चाहते हों वास्तु से अच्छा नतीजा।।

शौचकूप (सैप्टिक टैंक) उत्तर दिशा के मध्यभाग में बनाना सर्वोचित रहता है। यदि वहाँ सम्भव न हो तो पूर्व के मध्य भाग में बना सकते हैं परंतु वास्तु के नैर्ऋत्य, ईशान,दक्षिण, ब्रह्मस्थल एवं अग्नि भाग में सैप्टिक टैंक बिल्कुल नहीं बनाना चाहिए।

प्लॉट या मकान के नैर्ऋत्य कोने में बना कुआँ अथवा भूमिगत जल की टंकी सबसे ज्यादा हानिकारक होती है। इसके कारण अकाल मृत्यु, हिंसाचार, अपयश, धन-नाश, खराब प्रवृत्ति, आत्महत्या, संघर्ष आदि की सम्भावना बहुत ज्यादा होती है।

परिवार के सदस्यों में झगड़े होते हों तो परिवार का मुख्य व्यक्ति रात्रि को अपने पलंग के नीचे एक लोटा पानी रख दे और सुबह गुरुमंत्र अथवा भगवन्नाम का उच्चारण करके वह जल पीपल को चढ़ायें। इससे पारिवारिक कलह दूर होंगे, घर में शांति होगी।

झाड़ू और पोंछा ऐसी जगह पर नहीं रखने चाहिए कि बार-बार नजरों में आयें। भोजन के समय भी यथासंभव न दिखेंऐसी सावधानी रखें।

घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए रोज पोंछा लगाते समय पानी में थोड़ा नमक मिलायें। इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव घटता है। एक डेढ़ रूपया किलो खड़ा नमक मिलता है उसका उपयोग कर सकते हैं।

घर में टूटी-फूटी अथवा अग्नि से जली हुई प्रतिमा की पूजा नहीं करनी चाहिए। ऐसी मूर्ति की पूजा करने से गृहस्वामी के मन में उद्वेग या घर-परिवार में अनिष्ट होता है।

(वराह पुराणः 186.43)

50 ग्राम फिटकरी का टुकड़ा घर के प्रत्येक कमरे में तथा कार्यालय के किसी कोने में अवश्य रखना चाहिए। इससे वास्तुदोषों से रक्षा होती है।

किसी दुकान या प्रतिष्ठान के मुख्य द्वार पर काले कपड़े में फिटकरी बाँधकर लटकाने से बरकत आती है। दक्षिण भारत व अधिकांशतः दुकानों के मुख्य द्वार पर फिटकरी बाँधने का रिवाज लम्बे समय से प्रचलित है।

 

डेली रूटीन बदलें मालामाल बने

 

दैनिक दिनचर्या में कुछ छोटी छोटी बातें ऐसी होती है जिन पर ध्यान दिया जाए तो आप पर लक्ष्मी मेहरबान हो सकती है। ये ऐसी बातें हैं जिनका ध्यान रखा जाए तो पैसों से जुड़े हर तरह के दोष खत्म हो जाएंगे। अगर घर में पैसा नहीं बच रहा है या कोई सदस्य लंबे समय से बीमार चल रहा हो और पैसा बीमारी में ही खर्च हुए जा रहा हो तो समझ लिजीए कोइ न कोइ दोष आपको परेशान कर रहा है। लेकिन आपको इन परेशानियों से बचने के लिए किसी विशेष उपाय की जरूरत नहीं है। बस आपको ध्यान रखना है अपने डेली रूटीन से जुड़ी छोटी छोटी बातों का, जिनको थोड़ा सा बदलें तो आप पर लक्ष्मी जरूर मेहरबान हो जाएगी।

 

इन बातों को ध्यान रखें-

रात्रि में बर्तन झूठे न रखें ।घर में पोछा लगाते समय पानी में सांभर नमक या सेंधा नमक डाल लें ।शयन करते समय सिरहाना पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर रखने से धन व आयु की बढ़ोत्तरी होती है ।भोजन करते वक्त पूर्व की ओर मुंह करके भोजन करने से आयु और उत्तर की ओर मुंह करके भोजन करने से धन की प्राप्ति होती है ।घर के आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में सिक्कों वाला धातु का कटोरा रखें और उसमें ऐसे सिक्के जो रास्ते में पड़े मिले या पैसे गिनते वक्त गिरे हुए पैसें डालते जाएं। ऐसा करने से घर में अचानक धनागम होने लगेगा ।घर में झाडू व पोंछा खुले स्थान पर न रखें । खासकर भोजन कक्ष में झाडू नहीं रखनी चाहिए । इससे धन की हानि होती है । रात में झाडू को उलटी करके घर के बाहर मुख्य दीवार के सामने रखने से चोरों को डर नहीं रहता ।रोज सूर्यास्त के बाद तुलसी के पौधें को दीपक लगाएं।